क्या अब सरकारी अध्यापकों को मंदिरों में बांटना होगा प्रसाद…यह कैसा है शिक्षा विभाग का तुगलकी फरमान…

आए दिन सरकार के नए-नए निर्देशों से गुरू जी यानी सरकारी टीचर बेचैन नज़र आ रहें हैं, जिन कंधों पर देश का भविष्य तैयार करने की जिम्मेवारी हैं उनसे खट्टर सरकार मंदिर में प्रसाद बांटने का काम करवाना चाहती हैं। दरअसल हर साल यमुनानगर में लगने वाले प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक मेले कपाल मोचन में लाखों की संख्यां में देशभर से श्रद्धालु एकत्रित होते हैं और सरकार इन टीचरों से वहां प्रसाद बंटवाने का काम करवाना चाहती थी।

दरअसल जिला प्रशासन ने एक नए आदेश जारी किए हैं जिसके अनुसार हर साल लगने वाले प्रसिद्ध एवं प्राचीन मेले कपाल मोचन के मंदिरों में इस साल सरकारी टीचर पुजारी की भूमिका निभाएंगे, और श्रद्धालुओं को प्रसाद भी बांटने का काम करेंगे।

इस काम के लिए बकायदा पुजारी ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें अध्यापक गए ही नही और नाराज होकर प्रशासन ने लेटर जारी कर आदेश दिए हैं कि जो टीचर पुजारी की ट्रेनिंग लेने नही आए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएं। अध्यापक इसे एक तुगलकी फरमान बता रहें हैं। और इसके खिलाफ प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ने की भी धमकी दे रहें हैं।

अध्यापक नेताओं का कहना हैं कि हरियाणा में लगातार शिक्षा के स्तर गिर रहा हैं, बच्चों का सलेबस पिछड़ रहा हैं, हर साल का रिजल्ट भी डाउन जा रहा हैं क्योंकि सरकार का ध्यान अध्यापकों से बच्चों को पढ़ाने से ज्यादा खेतों में जलती पराली की निगरानी करवाने, या फिर मंदिरों में पूजा पाठ आदि करवानें जैसे गैर शैक्षिक कार्यों पर ज्यादा रहता हैं।

यह फरमान सच में शिक्षा विभाग की कार्यवाही पर एक बड़ी सवालिया निशान खड़ा करता नज़र आ रहा है।