जाति कोई भी हो, समुदाय कोई भी हो, दो बालिग शादी करना चाहें तो उन्हें रोकना अपराध…

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई पूरी करते हुए…दो बालिगों की शादी में किसी तरह के हस्तक्षेप को गैर कानूनी करार दिया है….खास तौर पर खाप पंचायतों को सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दो बालिग युवक और युवती चाहे किसी भी समुदाय के हों…अगर वो शादी करना चाहते हैं तो उनके फैसले में किसी को भी दखल देने का अधिकार नहीं है…कोर्ट ने कहा कि चाहे पंचायतें हों, रिश्तेदार हो या कोई और हो…बालिग लोगों के शादी के फैसले पूरी तरह से स्वतंत्र होने चाहिए…शक्ति वाहिनी संस्था नाम की एक एनजीओ के मामले में कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है…सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बैंच ने फैसले में कहा कि ऑनर किलिंग के मामलों में लॉ कमीशन की सिफारिशों पर विचार हो रहा है लेकिन तब तक मौजूदा आधार पर ही कार्रवाई होती रहेगी…आपको बता दें कि अभी हॉरर किलिंग के मामलों में आईपीसी की धारा के तहत ही कार्रवाई होती है….
और सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से हरियाणा की खाप पंचायतें नाराज है…खापों ने फैसले पर नाराजगी जताई है..खाप पंचायतों का मानना है कि वो इस फैसले से संतुष्ट नहीं है और इसके खिलाफ वो कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे…रोहतक में नांदल खाप के पूर्व प्रधान महेंद्र सिंह नांदल ने तो याचिका दायर करने वाली संस्था पर ही हमला बोल दिया…नांदल ने कहा कि जिस संस्था ने कोर्ट में ये याचिका दायर की उसे इतिहास की जानकारी नहीं है…उन्होंने कहा कि खाप कभी भी हॉरर किलिंग जैसे मामलों में शामिल नहीं होती…बल्कि समाज सुधार का काम करती है..।उन्होंने कहा कि हम सिर्फ रीति रिवाजों का पालन करते हैं जो गलत नहीं है…उधर सोनीपत में भी खापों ने कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जताई है और इस मामले में पुनर्विचार याचिका की बात कही है…खापों के मुताबिक ये उनकी परंपरा और रीति रिवाजों पर किसी हमले की तरह है….