पद्मावती के पंगे पर राजपुताना मंच का संग्राम, पंचकूला में सरकार को फिर दी चेतावनी

पद्मावती कब रिलीज़ होगी, ये अभी तय नहीं है। फिल्म में पद्मावती के किरदार को किस प्रकार पेश किया गया है यह भी अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन इस सब के बावजूद फिल्म का विरोध निरंतर जारी है।  तथाकथित राजपूत संगठन न सिर्फ सड़कों पर उतर कर फिल्म का विरोध कर रहे हैं बल्कि फिल्म के निर्माता संजय लीला भंसाली और फिल्म में काम करने वाले कलाकरों को खुले आम धमकियाँ भी दे रहे हैं। राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना और राजपुताना विरासत जाग्रति मंच जैसे संगठन इस मुद्दे को लेकर पंचकूला में इकठ्ठा हुए और एक बार फिर दोहराया की पद्मावती को न सिर्फ हरयाणा बल्कि पूरे देश में रिलीज़ नहीं होने दिया जाए गा।  रैली को सम्बोधित करने वाले नेताओं का कहना था कि  संजय लीला भंसाली ने राजपुताना के गौरवशाली इतिहास के साथ छेड़छाड़ की है और इसे राजपूत किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

रैली में बोलने वाले सूरजपाल अम्मू जैसे नेताओं ने खट्टर सरकार पर भी तीख हमला किया।  इन का कहना था कि  हरियाणा सरकार इस मामले में ढुलमुल रवैया अपना रही है।  इन नेताओ के मुताबिक अगर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के मुख्यमंत्री फिल्म पर बैन लगाने का एलान कर सकते हैं तो फिर हरियाणा सरकार को ऐसा करने में क्यों दिक्कत हो रही है।  रैली में एलान किया गया कि राजपूत संगठन हरियणा सरकार के इस रवैये के खिलाफ जिला स्तर पर आंदोलन करेगी।

इस से पहले राजपूत संगठनों का एक प्रतिनिधि मंडल फिल्म पर प्रतबंध लगाने की अपनी मांग को लेकर राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी से मिला। राज्यपाल को दिए अपने ज्ञापन में इन संगठनों ने मांग की कि पद्मावती को राज्य में किसी भी सूरत में रिलीज़ न होने दिया जाए।

पद्मावती को लेकर राजपूत संगठन लगातार धमकियाँ दे रहे हैं।  वह लगातार क़ानून अपने हाथ में लेने की धमकी दे रहे हैं।  क्या सरकार इन के खिलाफ कार्रवाई करेगी। यह एक बड़ा सवाल है।