प्रदेशभर में छाया स्मॉग…आंखों में जलन और सांस लेने में हो रही है दिक्कत…प्रदेशभर में सड़क हादसों में हुआ इजाफा

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प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में छाया हुआ स्मॉग सभी की परेशानी का सबब बना है। लोग आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होने की शिकायत कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों की मानें तो एक नवंबर के बाद से अब तक प्रदेश में कई जगहों पर पराली जलाई जा चुकी है। लगातार पराली जलाए जाने व मौसम में आए बदलाव के चलते फॉग ने स्मॉग का रूप ले लिया है। इसके चलते धुएं से पैदा हुई जहरीली गैसें व सस्पेंडेड पार्टिकल्स ऊपर जाने की बजाए नीचे ही रह गए हैं। पूरे दिन हल्की धुंध जैसा आवरण बन रहा हा, जिसके कारण लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी तो साथ ही आंखों में जलन भी महसूस हुई।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर तो स्मॉग चार से पांच दिन के बाद अपने आप ही चला जाता है। मगर कई बार बारिश होने तक स्मॉग का असर वातावरण में बना रहता है।

आपको बता दें कि स्मॉग शब्द अंग्रेजी के दो शब्दों स्मोक और‘फॉग से मिलकर बना है। गर्म हवा हमेशा ऊपर की ओर उठने की कोशिश करती है, जबकि ठंडी हवा नीचे आने का प्रयास करती है। थोड़ी ही देर में ऐसी हलचल होती रहती है और हवा की इन दोनों गर्म और ठंडी परतों के बीच हरकतें रुक जाती हैं। इसी बदलाव के कारण स्मॉग बनता है।

और स्मॉग के कारण विजीबिलिटी नाममात्र रह गई है जिस कारण सड़क हादसों का सिलसिला भी लगातार जारी है। बीते दिन भी प्रदेश के कई हिस्सों में दर्जनों वाहन आपस में टकराए हैं।

स्मॉग होने पर वातावरण में मिश्रित प्रदूषण करने वाले हानिकारक तत्व हवा में मौजूद रहते हैं। जो लोगों की सेहत के लिए बहुत खतरनाक हैं। धुएं में एसपीएम 2.5 एमएम भी होते हैं जो सांस के साथ फेफड़ों में घुस जाते हैं। इन्हीं गैसों व पार्टिकल्स के कारण न केवल आंखों में जलन बल्कि आंखें लाल होना, आंखों में एलर्जी हो सकती है।

 

वहीं मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों खासकर रात के समय में धुंध ज्यादा बढ़ेगी। चैधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक के अनुसार दिपावली से हुए पटाखों के धुएं का असर, किसानों द्वार पराली जलाना, फैक्ट्रियों के धुएं सहित अन्य कारणो से उत्पन्न हुए धुएं के कारण मौसम में धुंधलापन आ गया है और साथ ही धुंध भी बढ़ रही है। जो मिलकर स्मॉग बना रही है।