हरियाणा

यमुनानगर: मधुमक्खी पालन से सालाना कमा रहे 35-40 लाख रुपये, पीएम मोदी ने 'मन की बात' में की तारीफ

By Vinod Kumar -- August 01, 2022 3:41 pm

यमुनानगर/तिलक भारद्वाज: सुभाष कंबोज आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। पीएम मोदी खुद उनकी तारीफ कर चुके हैं। घर का शहद खाने के शौकीन सुभाष कंबोज ने सिर्फ अपने लिए मधुमक्खी पालन शुरू किया था। धीरे धीरे इन्होंने इसका विस्तार किया और देशभर में वो अपने हाथों से तैयार किए शहद की मिठास घोल रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कल प्रसारित हुए मन की बात कार्यक्रम में मधुमक्खी पालन करने वाले यमुनानगर के मेहनतकश सुभाष कंबोज की सराहना की। ये दूसरी बार है जब पीएम ने सुभाष के काम को मन की बात में सराहा है । किसान सुभाष पीएम मोदी द्वारा की गई सराहना को लेकर बेहद खुश है उनका कहना है कि इससे बड़ी बात उनके लिए क्या हो सकती है। वहीं, उन्होंने इसका श्रेय उन सभी अधिकारियों और उन लोगों को दिया जिनसे उन्होंने सब कुछ सीखा और आज समृद्ध किसान बने।

रादौर खंड के गांव हाफिजपुर निवासी 54 वर्षीय मधुमक्खी पालक किसान सुभाष कांबोज की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्म निर्भरता के क्षेत्र में पूर्व अध्यापक की व्यवसाय की शैली अपने आप में एक उदाहरण है। देशवासी उनके व्यवसाय को अपनाकर आत्म निर्भर बने। वहीं, सुभाष कांबोज प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम का हिस्सा बनने पर काफी उत्साहित है। कांबोज ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा की गई प्रशंसा से उन्हें जीवन में और आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलेगा। वह स्नातक पास है और उन्होंने डीपीएड का डिप्लोमा भी किया हुआ है।

1996 से पहले उन्होंने निजी विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्य किया है। कांबोज ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा की गई प्रशंसा से उन्हें जीवन में और आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने बताया कि वह 10 एकड़ में खेती करते हैं। 1996 में खादी ग्राम उद्योग से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद मधुमक्खी पालन के 6 बॉक्स से उन्होंने काम शुरू किया था। 2006 से लेकर अब तक उनके पास लगभग 2 हजार मधुमक्खी के बॉक्स हैं। यह सभी बॉक्स भी पारंपरिक 6 बक्सों से ही विकसित किए हैं।

सुभाष कांबोज ने बताया कि वह पूरे भारत में खुद शहद की बिक्री करते हैं। उनका शहद तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल आदि में बिकता है। वहीं दूसरी ओर सरसों के फूलों का शहद अमेरिका समेत कई अन्य देशों में जाता है। सरसों के फूलों से मधुमक्खियों द्वारा तैयार किए गए शहद की बाहर के देशों में ज्यादा मांग है। उनका शहद के कारोबार में 35 से 40 लाख रुपये का टर्न ओवर है। जिसमें से लगभग 15 लाख रुपये की सालाना शुद्ध आमदनी होती है। अब तक वह हजार से ज्यादा लोगों को मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण देकर आत्म निर्भर बना चुके हैं।

खेतों में पारंपरिक फसलों के अलावा एक बाग भी लगाया हुआ है जहां पर मधुमक्खियों के बॉक्स रखे जाते हैं। उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन से शहद के अतिरिक्त 6 उत्पाद- मोम, कोम्ब हनी, बी प्रोपोलिश, बी पोलन, वीवनम व रॉयल जैली भी तैयार करते हैं। उनके शहद के लिए उन्हें राष्ट्रीय ,राज्य और जिला स्तर पर भी कई बार सम्मानित किया जा चुका है।

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