राई फैक्ट्री अग्निकांड में फिर सामने आई बड़ी लापरवाही…

पहले हादसा होता है…फिर जांच की बात होती है…और फिर कार्रवाई का आश्वासन मिलता है…कुछ दिनों ये हल्ला चलता है…और फिर दोबारा हालात कमोबेश वैसे ही बन जाते हैं…सोनीपत के राई फैक्ट्री अग्निकांड में भी कुछ यही हो रहा है…लेकिन इसके अलावा जो एक बात इस अग्निकांड में सामने आई है वो एक बार फिर सिस्टम में लगी दीमक को जगजाहिर करती है…एक ऐसी फैक्ट्री जो कई सालों से चल रही है…लेकिन इसके चलने का पता न तो श्रम विभाग को है….न ही इंडस्ट्री हेल्थ एंड सेफ्टी रिकॉर्ड में कहीं इस फैक्ट्री का नाम है…
सरकारी कागजों फैक्ट्री का कोई अता पता ही नहीं था…फीस, लाइसेंस, सेफ्टी रूल्स, टैक्स, प्रोडक्शन, टर्नओवर वगैरह वगैरह…ये सारे अल्फाज इस मामले में बेमानी लगते हैं…क्योंकि जिस फैक्ट्री का सरकार को पता ही नहीं…उससे कैसी फीस, कैसा लाइसेंस….पिछले कई सालों में न सरकारी विभागों ने इस फैक्ट्री को जानने की हिम्मत दिखाई…न इसे जांचने की जहमत उठाई….और जब हादसा हो गया…तो दल बल के साथ जांच का टोकरा लेकर सरकारी सिपहसालार पहुंच गए फैक्रट्री की राख पर….
इस हादसे में 5 मजदूर मारे गए थे…और अब खबर है कि छठा मजदूर जो अस्पताल में भर्ती था…उसकी भी मौत हो गई है…बावजूद इसके…कार्रवाई की सिर्फ बातें हो रही है…सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं…
हादसे को पांच दिन बीत गए..एक मजदूर अब तक लापता है…मरने वालों के घरवालों का मुआवजे का मरहम चिपका दिया गया है…कार्रवाई के आश्वासन का लॉलीपॉप भी थमा दिया गया है..कैमरे पर….दोषियों को बख्शेंगे नहीं वाली थ्योरी..,सरचढ़ कर बोल रही है…लेकिन प्रदेशभर में बाकि फैक्ट्रियों के हाल ऐसे नहीं है…इसकी गारंटी देने को कोई तैयार नहीं…राई अग्निकांड में फैक्ट्री मालिक लापता है…और उन मजदूरों की मौत का जिम्मेदार कौन है इसका जवाब देने को भी…कोई तैयार नहीं है….