हरियाणा की बदलती तस्वीर – लिंग अनुपात के आंकड़ों में आया बड़ा सुधार…आएँ जानें क्या है नए आंकड़ें

हरियाणा में ऐसा पहली बार हुआ है जब लिंग अनुपात में एक बड़े पैमाने पर सुधार हुआ है। राज्य ने वर्ष 2017 में 1000 लडक़ों पर 914 लड़कियों का सर्वोच्च लिंग अनुपात दर्ज किया है, जबकि यह लिंग अनुपात वर्ष 2016 में 900 और वर्ष 2015 में 876 था। 17 जिलों ने 900 से अधिक के जन्म पर लिंग अनुपात के आंकड़े को हासिल किया है, वर्ष 2017 में कोई भी जिला 880 के आंकड़े से नीचे नहीं रहा।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2015 में पानीपत से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के शुभारंभ करने के बाद से राज्य में कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाने और कानून को दृढ़ता से लागू किया गया। राज्य सरकार ने लिंग अनुपात पर अंकुश लगाने के लिए बहुआयामी अभियान चलाया। इसके तहत राज्य सरकार ने अनधिकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों, अल्ट्रासाउंड/स्कैनिंग इंस्टीट्यूटों पर छापे मारकर अपराधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके, लिंग निर्धारण, कन्या भ्रुण हत्या के घृणित कार्य में लगे अपराधियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की।

यह पाया गया कि योग्य रेडियोलॉजिस्ट और डॉक्टरों के अलावा, अप्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता, प्रयोगशाला या एक्स-रे तकनीशियन या ऑपरेशन थिएटर के सहायक, जो अवैध लिंग निर्धारण के टैस्टों का संचालन कर रहे थे। राज्य के विभिन्न हिस्सों और अंतर-राज्य छापे मारकर ऐसे रैकेटों का भंडाफोड़ किया गया। इसके अलावा, अवैध रूप से प्रयोग किये गए पोर्टेबल, अल्ट्रासाउंड मशीनों को कब्जे में लिया गया।

अभियान के दौरान, पीएनडीटी अधिनियम के तहत अंतरराज्यीय संयुक्त छापों की भी योजना बनाई गई और इसे राज्य की सीमा पार कन्या भु्रण हत्या के लिए लिंग निर्धारण में लगे अपराधियों को पहली बार काउंटर पार्ट राज्य के अधिकारियों के सहयोग से गिरफ्तार किया गया। पड़ौसी पांच राज्यों में 126 राज्य व सीमा पार छापे मारे गए और अपराधियों के विरूद्ध पीसी-पीएनडीटी/एमटीपी अधिनियम के तहत लगभग 550 एफआईआर दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त, पिछले दो वर्षों के दौरान बिना किसी पे्रसक्रिप्शन के गर्भपात के लिए एमटीपी किट्स के अवैध उपयोग सहित अवैध गर्भपात करवाने के सम्बंध में एमटीपी कानून के तहत 200 से अधिक एफआईआर दर्ज की गई।

यह गर्व की बात है कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में लिंग अनुपात की स्थिति बेहद चिंताजनक यानि 1000 लडक़ों पर 834 लड़कियां था, जिसमें राज्य सरकार के प्रयासों से उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जनवरी, 2017 से दिसम्बर, 2017 के दौरान प्रदेश में जन्मे 5,09,290 बच्चों में से 2,66,064 लडक़े और 2,43,226 लड़कियां हैं, लिंग अनुपात में आए उल्लेखनीय सुधार को दर्शाता है। इस प्रकार, लिंग अनुपात 1000 लडक़ों पर 871 लड़कियों से बढक़र 914 लड़कियां हो गया है।

वर्ष 2017 में 17 जिलों ने 900 या इससे अधिक की उपलब्धि हासिल की। कोई भी जिला 880 के आंकड़े से नीचे नहीं रहा। पानीपत 945 के एसआरबी के आंकड़े के साथ सर्वोच्च स्थान पर रहा। इसके उपरांत, यमुनानगर में यह आंकड़ा 943 का है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार महेन्द्रगढ़, रेवाड़ी, सोनीपत और झज्जर जिलों में शिशु लिंग अनुपात 800 से नीचे था, में भी उनके एसआरबी आंकड़ों में क्रमश: 136, 91, 88, 96 अंकों का सुधार हुआ है।