होंद चिल्हड़ को ऐतिहासिक स्थान घोषित करने की मांग.. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे सिख विरोधी दंगे

रेवाड़ी के होंद चिल्हड़ गांव को अब ऐतिहासिकता का दर्जा दिए जाने की मांग उठने लगी है…साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद ये गांव भी सिख विरोधी दंगों की चपेट में आया था और अब उस दौर को याद करते हुए इस गांव को ऐतिहासिक स्थान घोषित करने की मांग उठ रही है….

साल 1984…और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजा वो सिख विरोधी उन्माद…ये वो दौर था जब सिख विरोधी दंगों ने पूरे देश में अपना रंग दिखाया…और रेवाड़ी के ऐतिहासिक होंद चिल्हड़ गांव में ये खूनी रंग…और ज्यादा लाल हो गया…

होंद चिल्हड़ गांव के इस इलाके को आज ऐतिहासिक स्थान घोषित करने की मांग उठ रही है…सिख स्टूडेंट फेडरेशन ने इसके लिए एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया है…और इसकी ऐतिहासिकता को संजोए रखने के लिए…लड़ाई भी लड़ रहे हैं….

दरअसल होंद चिल्हड़ वो गांव है जहां भारत पाक विभाजन के बाद कुछ सिख परिवार आकर बसे थे…लेकिन साल 1984 में सिख विरोधी दंगों के बीच ये गांव…पूरी तरह उजड़ गया…32 सिखों की हत्या हुई थी यहां…और जो बच गए…वो यहां से भाग कर दूसरी जगहों पर बस गए…रविवार को यहां उन्हीं सिखों की याद में आयोजन हुआ…और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई….

सिख स्टूडेंट फेडरेशन ने हस्ताक्षर अभियान के तहत एक लाख लोगों के हस्ताक्षर का लक्ष्य रखा है…साथ ही पीएम मोदी से भी इस मामले में जल्द न्याय दिलाने…और इस जगह को ऐतिहासिकता का दर्जा देने की मांग की है….