अशोक अरोड़ा तुम भी…

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अशोक अरोड़ा तुम भी...

चंडीगढ़। (संजय मल्होत्रा) इनेलो से नेताओं और कार्यकर्ताओं का पलायन पिछले काफी समय से जारी है। पर अशोक अरोड़ा का पार्टी से जाना निश्चित रूप से पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका है। अशोक अरोड़ा इनेलो में चौटाला परिवार से बाहर सबसे अहम चेहरा थे। करीब 15 साल तक वह पार्टी की सूबा इकाई के अध्यक्ष रहे। जब जब भी इनेलो की सरकार बनी तो सरकार में उन्हें अहम औहदों से नवाजा गया। चौधरी देवी लाल के जमाने में इनेलो से जुड़ने वाले अशोक अरोड़ा 1990 में पहली बार विधायक बने। इनेलो कार्यकाल के दौरान वह विधानसभा के स्पीकर भी रहे। आखिरी ओम प्रकाश चौटाला सरकार में भी वह परिवहन मंत्री बनाए गए थे।

लोकसभा चुनावों की हार के बाद अशोक अरोड़ा ने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि बाद में उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंप दी गई। लेकिन उनकी पार्टी छोड़ने की चर्चा लगातार चलती रही। आखिरकार मंगलवार 10 सितंबर को अरोड़ा ने इनेलो को अलविदा कह दिया। उनका अगला कदम क्या रहने वाला है, उसका खुलासा उन्होंने नहीं किया है। पर अगर सूत्रों की मानी जाए तो अरोड़ा का अगला पड़ाव कांग्रेस बताया जा रहा है।

बहरहाल अरोड़ा के फैसले ने इनेलो की तो कमर ही तोड़ कर रख दी है। पार्टी में अब ले देकर ओम प्रकाश चौटाला और अभय चौटाला ही नजर आ रहे हैं। करीब-करीब बाकी सब नामवर नेता पार्टी से किनारा कर चुके हैं। अब बात परिवार को एकजुट करने की हो रही है। जो हालात हैं शायद चौटाला खानदान फिर से एक हो भी सकता है। पर जो सियासी नुकसान उन्हें पहुंचा है उसकी भरपाई होना अब काफी मुश्किल नजर आ रहा है।

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—PTC NEWS—