हरियाणा

संसद में मोदी सरकार का जवाब, कहा: चीन ने हमारे 38 हजार वर्ग KM जमीन पर किया है कब्जा

By Vinod Kumar -- February 05, 2022 11:54 am

चीन अपनी आक्रामक विस्तारवादी नीति के लिए जाना जाता है। भारत के कई इलाकों को हथियानों में चीन 1962 से जुटा है। इसके लिए वो कई तरह के हथकंडे अपनाता रहा है। चीन एलएसी पर अवैध निर्माण की गतिवविधियों को अंजाम देता आया है। पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील (Pangong Lake) पर चीन की ओर से किए जा रहे पुल पर भारत सरकार ने संसद में कहा कि वो इलाका 1962 से बीजिंग के गैरकानूनी कब्जे में है। विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन (V Muraleedharan) ने इस बात की जानकारी एक सवाल के लिखित जवाब में दी है।

उन्होंने कहा कि चीन भारत की 38 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन पर लगातार अवैध कब्जा कर रहा है। यह काम वह पिछले 6 दशक से कर रहा है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में पिछले 6 दशकों से चीन ने करीब 38 हजार वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर रखा है। उन्होंने कहा कि 1963 में पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा किए गए शक्सगाम घाटी के 5 हजार 180 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र को अवैध रूप से चीन को सौंप दिया था।

उन्होंने कहा कि भारत ने इस अवैध कब्जे को कभी स्वीकार नहीं किया है। सरकार ने कई मौकों पर स्पष्ट किया है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है और हम उम्मीद करते हैं कि पड़ोसी देश भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे।’ सरकार ने संसद को बताया कि भारत और चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के विवादित क्षेत्र के संबंध में राजनयिक और सैन्य दोनों चैनलों के माध्यम से बातचीत जारी रखी है।

इससे पहले चीन के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 3 फरवरी को संसद में केंद्र सरकार की जमकर आलोचना की थी। राहुल गांधी ने कहा था कि केंद्र की गलत नीतियों के चलते चीन और पाकिस्तान एक साथ आए हैं। यह भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। राहुल ने कहा था कि चीन के पास एक क्लियर प्लान है और उसकी नींव डोकलम और लद्दाख में रखी है।

होशियारपुर की रैली में राहुल गांधी के इन आरोपों का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि उन्हें इतिहास की जानकारी नहीं है। जब पाक ने शक्सगाम घाटी चीन के हवाले की, उस वक्त जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री थे। अक्साई चीन जब बना तब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। चीन-पाकिस्तान के बीच इकोनॉमिक कॉरिडोर 2013 में बना, उस वक्त देश में कांग्रेस का शासन था।

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