हरियाणा

PM Modi Security Lapse: सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई, SC के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाने के आदेश

By Vinod Kumar -- January 10, 2022 12:58 pm -- Updated:January 10, 2022 1:00 pm

PM Modi Security Lapse: पंजाब में पीएम मोदी की सुरक्षा में हुई चूक के मामले पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने फिर से सुनवाई की। सीजेआई एनवी रमना ने कहा कि पीएम सुरक्षा में चूक मामले की जांच अब सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। इस जांच कमेटी में चंडीगढ़ के डीजीपी, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और एक अन्य अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा एनआईए के आईजी और आईबी के अधिकारी भी कमेटी का हिस्सा होंगे।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमणा ने कहा कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने आज ही हमें रिपोर्ट सौंपी हैं। याचिकाकर्ता के वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि आप कल या परसों सुनवाई कीजिए, ताकि आप रिपोर्ट देख लें और हम भी दलीलें रख सकें।

PM Narendra Modi's 'security breach' case: Punjab seeks court-monitored probe

वहीं, पंजाब सरकार की ओर से पेश वकील डीएस पटवालिया ने कहा कि हमारी कमेटी पर गलत सवाल उठाए गए हैं। हमारे अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। चीफ सेक्रेटरी से कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया। हम चाहते हैं कि कोर्ट पूरा मामला देखे। बिना जांच के हमें दोषी ठहराया जा रहा है।

पटवालिया ने कहा कि, मुख्य सचिव को अपने खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर जवाब देने के लिए 24 घंटे दिए गए। हम पीएम की सुरक्षा को लेकर गंभीर हैं। कोर्ट देखे कि बिना जांच हम पर कार्रवाई न हो। इसके बाद CJI ने कहा कि केंद्र से नोटिस हमारे आदेश से पहले जारी हुआ या बाद में। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि पहले जारी हुआ था। जो नोटिस चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी को जारी हुआ उसका कानूनी आधार है।

सॉलिस्टर जनलर ने कहा कि हम डीजी और मुख्य सचिव को जारी कारण बताओ नोटिस पर भरोसा कर रहे हैं। कुछ भ्रांतियां हैं। समिति की नियुक्ति से कोई सुनवाई नहीं होती है। कृपया, सुरक्षा शब्द की परिभाषा देखें। एसपीजी का क्या कार्य है? पीएम का काफिला उस स्थान पर पहुंच गया था जो विरोध क्षेत्र से 100 मीटर दूर था। कृपया, एसपीजी अधिनियम की धारा 4 देखें। ब्लू बुक नाम की एक किताब है, जो पीएम की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले सूक्ष्म कदमों की जानकारी देती है।

ब्लू बुक के अनुसार यह अधिकारियों पर निर्भर होगा कि नियमों को सख्ती से लागू किया जाए और राज्य सरकार ऐसे अधिकारियों को निर्देशित करें, ताकि वहां किसी तरह की असुविधा ना हो।

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