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राजनीति

भाई-भतीजा, पोता और बहू के बीच फंसी 'नेताजी' की पुश्तैनी सीट

By Vinod Kumar -- November 7th 2022 04:42 PM -- Updated: November 7th 2022 06:30 PM
भाई-भतीजा, पोता और बहू के बीच फंसी 'नेताजी' की पुश्तैनी सीट

लखनऊ/मोहम्मद जुबैर खान: देश में जब भी लोकसभा चुनाव होते हैं, तो आमतौर पर ये ख़ूब सुनने को मिलता है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ होकर जाता है। ये सही भी है, लेकिन इस बात का ख़्याल रखा जाना चाहिए कि इस बड़े रास्ते में तकरीबन 80 छोटे रास्ते भी मिलते हैं, तक कहीं जाकर ये रास्ता मुक़म्मल तौर पर दिल्ली जाने की क़वायद को अमलीजामा पहनाता है। ऐसा ही एक रास्ता मैनपुरी वाला है। 

भले ही बीते दिनों समाजवादी पार्टी के पूर्व संरक्षक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का निधन हो गया हो, लेकिन नेताजी की पुश्तैनी मैनपुरी लोकसभा सीट की अहमियत और लोकप्रियता किसी भी लिहाज़ से कम नहीं हुई है। चुनाव आयोग ने जब से मैनपुरी में उपचुनाव की तारीख़ का ऐलान किया है, तब से समूचे मैनपुरी लोकसभा क्षेत्र में गहमा-गहमी का माहौल पैदा हो गया है। मैनपुरी में 5 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे और तीन बाद नतीजे सामने आएंगे।

हालांकि समाजवादी पार्टी का गढ़ कहे जाने वाले मैनपुरी में सपा की तरफ से कौन चुनावी रण में उतरेगा, ये अभी तक साफ नहीं हो सका है, लेकिन सियासी जानकार ऐसा मानकर चल रहे हैं कि गतिशील समाजवादी पार्टी-लोहिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव मैनपुरी से चुनाव लड़ सकते हैं। वैसे अगर ऐसा होता है तो सैफई परिवार में फैली अदावत, एकजुटता में बदल सकती है।

वहीं मीडिया हलकों में फैल रही कानाफूसी के मुताबिक़ सपा प्रमुख अखिलेश यादव तेज प्रताप सिंह यादव को मैनपुरी उपचुनाव के मैदान में उम्मीदवार बनाने का मन बना चुके हैं। तेज प्रताप पहले भी इस सीट से सांसद रह चुके हैं। तेज प्रसाद यादव 2014 में मैनपुरी से सांसद बने थे। तब मोदी लहर में भी तेज प्रताप ने इस सीट से चुनाव लड़ते हुए अपने विरोधी को 3 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हराया था, जिसके बाद तेज प्रताप यादव कई दिनों तक अख़बारों का सुर्ख़ियां बने थे।

तेज प्रताप सिंह यादव अखिलेश के भतीजे हैं। दरअसल तेज प्रताप, मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई रतन सिंह यादव के बेटे रणवीर सिंह यादव के बेटे हैं। तेज प्रताप की शादी लालू प्रसाद यादव की सबसे छोटी बेटी राजलक्ष्मी से हुई है। 

तेज प्रताप और शिवपाल यादव के अलावा धर्मेद्र यादव और डिंपल यादव के नामों को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा जारी है। कुल-मिलाकर जब तक किसी एक नाम पर पार्टी की मुहर नहीं लगती है, तब तक कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी। 

अगर अखिलेश मैनपुरी की सीट से भतीजे तेज प्रताप को लड़वाते हैं, तो एक बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि फिर उनके चाचा शिवपाल यादव का क्या होगा। गौरतलब है कि मुलायम सिंह यादव के अंतिम संस्कार के दौरान, चाचा शिवपाल, भतीजे अखिलेश के साथ मज़बूती से खड़े नज़र आए थे।

2019 के लोकसभा चुनाव में शिवपाल यादव ने कहा था कि अगर नेताजी मैनपुरी सीट से चुनाव लड़ेंगे तो उनकी दावेदारी नहीं होगी, लेकिन अगर कोई दूसरा उम्मीदवार होगा तो वो भी चुनाव में शिरकत करेंगे। अब मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद अगर शिवपाल अपनी इस बात पर कायम रहते हैं, तो अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के लिए एक और बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है।

- PTC NEWS

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