Sun, Feb 5, 2023
Whatsapp

अरे भाई मजाक नहीं सच है! अब हवा में उगेगा आलू...ये है इसकी खासियत

अब हवा में भी आलू पैदा होगा। शृंगीरामपुर की टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला में एरोपोनिक विधि (मिट्टी के बिना हवा में पानी के जरिए) से आलू का बीज तैयार किया जा रहा है। शृंगीरामपुर की प्रयोगशाला में कृषि वैज्ञानिक डॉ. राहुल पाल इन दिनों मिट्टी के बिना हवा में पानी के जरिए (एरोपोनिक) आलू का बीज तैयार कर रहे हैं

Written by  Vinod Kumar -- January 23rd 2023 03:46 PM
अरे भाई मजाक नहीं सच है! अब हवा में उगेगा आलू...ये है इसकी खासियत

अरे भाई मजाक नहीं सच है! अब हवा में उगेगा आलू...ये है इसकी खासियत

फर्रुखाबाद/ज्ञानेंद्र शुक्ला: अब हवा में  भी आलू पैदा होगा। ये मजाक नहीं है। आलू की खेती करने वाले किसानों को ऐसा बीज मिलेगा, जिससे फसल में रोग नहीं लगेगा। शृंगीरामपुर की टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला में एरोपोनिक विधि (मिट्टी के बिना हवा में पानी के जरिए) से आलू का बीज तैयार किया जा रहा है। एरोपोनिक विधि से आलू बीज तैयार करना नवीनतम तकनीक है। इस बीज से फसल में रोग व बीमारी लगने की संभावना बहुत कम हो जाती है। पैदावार के साथ आलू की गुणवत्ता भी बढ़ जाती है। 

शृंगीरामपुर की प्रयोगशाला में कृषि वैज्ञानिक डॉ. राहुल पाल इन दिनों मिट्टी के बिना हवा में पानी के जरिए (एरोपोनिक) आलू का बीज तैयार कर रहे हैं। अफ्रीका से नौकरी छोड़कर यहां काम कर रहे डॉ. राहुल की यह पहल उन्नतशील किसानों की आमदनी बढ़ाने का बेहतर विकल्प है। उन्होंने बताया कि परंपरागत तकनीक से खेती कर रहे किसान अक्सर आलू में चेचक, घुघिया और अन्य रोग लगने से परेशान हो जाते हैं। रोग के कारण पैदावार घटने से आलू किसानों को आर्थिक रूप से घाटा उठाना पड़ता है। 


हालांकि आलू में रोग लगने का एक मुख्य कारण प्रदूषण है। डॉ. राहुल ने बताया कि नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और शिमला के केंद्रीय आलू संस्थान (सीपीआरआई) में एरोपोनिक तकनीक से तैयार की गई पौध मिलती है। वह शिमला से आलू की पौध लाए हैं। इसके बाद स्थानीय प्रयोगशाला के ग्रीन हाउस के कोकोपिट में ये पौधे लगा दिए जाते हैं। एक माह बाद करीब चार इंच का पौधा हो जाता है। इसके बाद एरोपोनिक विधि से बीज तैयार करने के लिए पौधे को ग्रोथ चेंबर (बॉक्स) में लगाया गया।

डॉ. राहुल पाल के सहयोगी नीरज शर्मा ने बताया कि ग्रोथ चेंबर में बॉक्स के अंदर जड़ें तीन फीट तक बढ़ती हैं। पत्तियां ऊपर खुली हवा में रहती हैं। एक पौधे की जड़ में 50 से 60 आलू के बीज तैयार हो जाते हैं। मिट्टी न होने से इनमें फंगस, बैक्टीरिया नहीं लगता है। इस तरह रोग रहित बीज तैयार होता है।

पौधों को पोषक तत्व बॉक्स के नीचे पाइप लाइन से जुड़े स्वचालित फब्बारे से मिलते रहते हैं। प्रोटीन, विटामिन, हार्मोन्स, माइक्रोन्यूट्रीन आदि का घोल हर पांच मिनट के बाद 30 सेकंड तक फव्वारे से निकलता है। अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिले, इसकी रूपरेखा तैयार की जाएगी। 

- PTC NEWS

adv-img
  • Tags

Top News view more...

Latest News view more...