हरियाणा

एक बार फिर हजारों सालों बाद जीवित होगी वैदिक नदी सरस्वती, हरियाणा-हिमाचल के बीच एमओयू साइन

By Vinod Kumar -- January 21, 2022 3:03 pm

पंचकूला: आज पंचकूला के सेक्टर-1 स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की मौजूदगी में शुक्रवार को आदिबद्री बांध निर्माण के लिए एमओयू साइन हुआ। इसके तहत तीन किलोमीटर लंबी झील बनेगी।

हिमाचल प्रदेश की 77 हेक्टेयर और हरियाणा की 11 हेक्टेयर भूमि पर 35 मीटर ऊंचे बांध का निर्माण होगा। आदिबद्री बांध 100 करोड़ रुपये से बनेगा। इस बांध से विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी में पानी छोड़ा जाएगा। सिरमौर जिले की सीमा पर बांध बनाने को हिमाचल प्रदेश जमीन दे रहा है। 35 मीटर ऊंचे आदिबद्री बांध के निर्माण से हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के किसानों को सिंचाई एवं पेयजल की आपूर्ति होगी।

सीएम मनोहर लाल ने इस दौरान कहा कि सरस्वती हरियाणा सरस्वती धरोहर बोर्ड बनाया है। साइंस के माध्यम से इसका चित्र लिए गए। धरती के नीचे पानी बहता हुआ दिखाई दिया है। भू वैज्ञानिकों को सब पता होता है। मुस्फाबाद कस्बा यमुनानगर में है। एक तालाब में महिलाएं पूजा करती हैं। यह तालाब सरस्वती नदी का हिस्सा है। पिहोवा में भी पिंडदान किया जाता है वो भी सरस्वती का हिस्सा है। पिपली में भी सरस्वती का बोर्ड लिखा हुआ है। तब विचार आया कि पानी का धारा प्रवाह बनना चाहिए। सीएम ने कहा कि आठ महीने लगातार पानी मिला करेगा। इससे श्रद्धा का भाव जागेगा।

शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर ने कहा कि मेरी दादी कहती थी कि पहले सरस्वती नदी धरती पर बहती थी। श्राप मिलने के बाद धरती के नीचे सरस्वती बहने लग गई। मेरा गांव बिलासपुर के नजदीक है। तब मैने कहा था कि नदी जमीन के नीचे नहीं चलती। दादी ऐसे ही बोल रही है। आज वैज्ञानिकों ने भी प्रमाणिक कर दिया कि सरस्वती नदी धरती के नीचे बहती है। वेदों की रचना भी सरस्वती नदी के किनारे हुई।

हरियाणा में 198 किलोमीटर  बहेगी नदी

हरियाणा में सरस्वती नदी 198 किलोमीटर बहेगी। यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल के एरिया से बहकर यह पंजाब के पटियाला के सतड़ाना के पास घग्गर नदी में मिलेगी। हिमाचल के क्षेत्र में बनने वाले बांध का निर्माण हिमाचल सरकार करवाएगी और इसके लिए फंड हरियाणा सरकार देगी।

224 हेक्टेयर मीटर पानी में से हिमाचल को 62 हेक्टेयर मीटर पानी मिलेगा। 77 एकड़ में डैम का निर्माण होगा।सरस्वती नदी से हरियाणा में लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर हरियाणा में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के लिए पिछले 7 साल से सरकार प्रयासरत थी।

समुद्रतल से 2000 मीटर ऊंचाई पर बनेगा बांध

बांध समुद्रतल से 2000 मीटर की ऊंचाई पर बनेगा। बांध की दीवार की ऊंचाई 37.5 मीटर होगी। मोटाई नीचे से 32 मीटर व ऊपर से 8 मीटर होगी। डैम पर कुल 215.33 करोड़ की लागत आएगी। 126.89 करोड़ बैराज- रिजर्वायर पर खर्च होंगे। 2024 तक नदी प्रवाह प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य है।

इस पहल के बाद अब सरस्वती नदी केवल वैदिक मंत्रों या पौराणिक पुस्तकों में ही नहीं, बल्कि धरातल पर नजर आएगी। देवभूमि हिमाचल और हरियाणा मिलकर इसे पुनर्जीवित करेंगे। सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाव और झेलम नदियों के समूह को पंचनद कहा गया। इन पांचों के साथ जब सिंधू औ सरस्वती नदी आ मिलती है तो इसे सप्तसिंधू कहा गया। अतीत में हजारों साल पहले सरस्वती नदी लुप्त हो गई। इसके बारे में कहा जाता है कि प्रयाग के निकट गंगा, यमुना में मिलती थी। इस संगम स्थल को त्रिवेणी कहा जाता था।

  • Share