पायलट की स्थिति माया मिली न राम जैसी न हो जाए…

Rajasthan political crisis | What will be Sachin Pilot next step

नई दिल्ली। (संजय मल्होत्रा) राजनीति के खेल में एक ही दिन में कितनी उठापटक हो सकती है। राजस्थान के घमासान को देखकर ये सब की समझ में आ गया होगा। कल तक मजबूत स्थिति में नजर आ रही अशोक गहलोत सरकार आज वेंटिनेटर पर पहुंचती नजर आ रही है। अशोक गहलोत को फिलहाल 104 विधायकों का समर्थन हासिल है। लेकिन जिस तेजी से आंकड़ा गिर रहा है, कोई हैरानी नहीं कि ये 101 से नीचे चला जाए और गहलोत सरकार धड़ाम से फर्श पर आ गिरे।

अशोक गहलोत को इन हालातों में पहुंचाने के लिए जिम्मेदार सचिन पायलट को इस सब से कोई फायदा होगा! फिलहाल तो ऐसा भी नहीं लग रहा। वैसे कल तक कांग्रेस का आलाकमान जहां सचिन पायलट को मनाने की कवायद में लगा था आज उसी आलाकमान ने रुख कड़ा कर लिया है। पायलट की प्रदेश अध्यक्ष के पद और उप मुख्यमंत्री के पद से छुट्टी कर दी गई है। उनके समर्थक दोनों मंत्रियों विश्वेंदिंर सिंह और रमेश मीणा को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

यानि दोनों पक्षों में किसी भी तरह की सुलह सफाई की सारी संभावनाएं खत्म हो गई है। बहरहाल गहलोत सरकार का मुस्तकबिल अब इस बात पर निर्भर करेगा कि किस तरह से कांग्रेस इस बगावत को हैंडल करती है। यानि बागियों की संख्या को किस तरह से कम से कम रखा जाता है। खबर आ रही है कि अशोक गहलोत ने राज्यपाल से मुलाकत करके दावा किया है कि उन्हें बहुमत हासिल है।

Rajasthan political crisis | What will be Sachin Pilot next step

उधर विपक्ष में बैठी भाजपा इस समय तीखी नजर पूरे घटनाक्रम पर रखे हुए हैं। सचिन पायलट भाजपा में शामिल होंगे या नहीं, इस पर तो कोई कुछ नहीं बोल रहा। हालांकि कुछ नेता ट्वीट पर ट्वीट कर रहे हैं और कह रहे हैं कि पायलट का भाजपा में स्वागत होगा।

सियासी उठापटक के बीच सचिन पायलट का अगला कदम क्या होने वाला है ये जानने के लिए बहुत माहिर विश्लेषक होना जरूरी नहीं है यानि वो भाजपा में ही देर सवेर जाने वाले हैं। पर यहां उनकी दाल कितनी गलती है इस सवाल का जवाब फिलहाल किसी भी सियासी पंडित के लिए दे पाना आसान नहीं होगा। पार्टी में वसुंधरा राजे सिंधिया और गजेंद्र शेखावत जैसे दिग्गज मौजूद हैं। राजे ने तो बयान भी दाग दिया है कि पायलट अगर भाजपा में आते हैं तो उन्हें केंद्र की राजनीति में रहना होगा, ऐसे में पायलट की स्थिति माया मिली न राम जैसे न हो जाए, ये खतरा बना हुआ है। पर वो सियासतदान ही क्या जो खतरों से डर जाए। अब राजनीति में अगर पसंदीदा मुकाम हासिल करना है तो जनाब रिस्क तो लेना ही होगा।

Rajasthan political crisis | What will be Sachin Pilot next step

वैसे पायलट इतने लाइटवेट भी नहीं ह।. गुर्जर मतदाताओं पर तो उनकी पकड़ साबित है। बाकि समुदायों में भी उनका दबदबा ठीक ठाक है। यानि भाजपा के दिग्गजों को उन्हीं के घर में स्पर्धा देने का माद्दा उनमें मौजूद है और फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया की मिसाल उनके सामने है। शिवराज सिंह चौहान के किले में सेंध लगाने की उनकी कामयाबी सचिन पायलट का हौंसला बढ़ा सकती है।

वैसे एकला चलो रे का विकल्प भी उनके सामने खुला है पर राजस्थान में अपनी पार्टी….मुश्किल काम है। कभी ऐसा हुआ नहीं है यहां पर…पर कौन जानता है कब क्या हो जाए….

—PTC NEWS—