हरियाणा

सियाचिन में 38 साल बाद मिला शहीद का पार्थिव शरीर, ऑपरेशन मेघदूत में पाई थी शहादत

By Vinod Kumar -- August 15, 2022 4:02 pm -- Updated:August 15, 2022 4:08 pm

सियाचिन ग्लेशियर में शहीद हुए लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला का पार्थिव शरीर 38 साल बाद मिला है। शहीद के परिवार को 38 साल बाद जब इसकी खबर मिली तो पूरा परिवार भावुक हो गया और पुराने जख्म फिर हरे हो गए। प्रशासन के मुताबिक शहीद का पार्थिव शरीर मंगलवार को हल्द्वानी पहुंचने की संभावना है।

जानकारी के मुताबिक 38 साल पहले ऑपरेशन मेघदूत में लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला (बैच संख्या 5164584) शहीद हो गए थे। शहादत के बाच उनका शरीर सेना को नहीं मिला था। 13 अगस्त को एक पुराने बंकर में लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला का शरीर 38 साल बाद मिला। सैनिक के शव के साथ सेना के नंबर वाली एक डिस्क भी मिली, जिससे उनकी पहचान की गई।

शहीद की पत्नी पिछले 38 साल से पति के शव का इतंजार कर रही थी। उन्होंने बताया कि शादी के नौ साल बाद उनके पति लापता हो गए थे और उस समय उनकी उम्र सिर्फ 28 साल थी, जबकि उनकी बड़ी बेटी चार साल व दूसरी बेटी डेढ़ साल की थी। शहीद हर्बोला की दो बेटियां। पिता के पार्थिव शरीर के मिलने के बाद दोनों बेटियां भावुक हो गई। 38 साल चंद्रशेखर हर्बोला का शव मिलने के बाद परिवार में गम और खुशी दोनों है।

बता दें कि लांसनायक चंद्रशेखर उस टीम का हिस्सा थे, जिसे प्वाइंट 5965 पर कब्जा करने का काम दिया गया था। ऑपरेशन मेघदूत के दौरान कई सैनिक हिमस्खलन की चपेट में आ गए थे। सेना ने बाकी सैनिकों के शव तो बरामद कर लिए थे, लेकिन लांसनायक चंद्रशेखर हर्बोला और पांच सैनिक का शव नहीं मिल पाया था।

चंद्रशेखर हर्बोला 15 दिसम्बर 1971 में कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। 29 मई 1984 को भारी हिमस्खलन के कारण पूरी बटालियन दब गई थी, जिसके बाद उन्हें शहीद घोषित कर दिया गया। हर्बोला के पार्थिव शरीर के मंगलवार को हल्द्वानी पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद उनका सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। मूल रूप से अल्मोड़ा के निवासी हर्बोला की पत्नी शांति देवी इस समय हल्द्वानी की सरस्वती विहार कॉलोनी में रहती हैं।

 

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