हरियाणा

10 साल से जंजीरों में बंधा है ये युवक, खुद मां ने ही लगाई बेड़ियां, जाने वजह

By Arvind Kumar -- August 10, 2021 11:39 am -- Updated:August 10, 2021 11:39 am

अंबाला। नारायणगढ़ तहसील के फतेहपुर गांव का एक परिवार पिछले एक दशक से नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। परिवार में एक बुजुर्ग महिला है जिसकी दिमागी हालत ठीक नहीं है। 2 बेटे हैं जिसमे से एक पूरी तरह स्वस्थ नहीं है तो दूसरे को जंजीरों से बांध कर रखा गया है। युवक सरबजीत की हालत और परिवार की दयनीय स्थिति देख इंसानियत पर सवाल खड़े होते हैं कि इस परिवार की मदद के लिए आज तक कोई आगे क्यों नहीं आया।

बताया जाता है कि जिस युवक सरबजीत को जंजीरों से बांध कर रखा गया है उसकी दिमागी हालत 10-12 साल पहले बिगड़ गयी थी। उसने परिवार के सदस्यों से मारपीट की थी। इसके बाद मां ने मजबूरी में बेटे के पांव में जंजीर बांध दी। उसके बाद से सरबजीत जंजीरों में हैं। सरबजीत का इलाज पैसों की कमीं के चलते न हो सका।

माँ दिमागी रूप से स्वस्थ नहीं है सरबजीत के पिता की मौत सालों पहले हो चुकी है तो किसी ने ईलाज की जहमत भी नहीं उठाई। आज घर में बिजली तक नहीं है। गांव के सरपंच अशोक कुमार ने इसकी जानकारी करनाल की मेरा आशियाना संस्था को दी तो आज उन्होंने सरबजीत को रेस्क्यू किया। उसे सालों बाद नहलाया। इस दौरान जंग खा चुके ताले को बहुत मुश्किल से तोड़ा गया।

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रेस्क्यू के दौरान सरबजीत की मां पूरे माजरे को देखती रही। मानो उसे कुछ पता ही न हो कि यह क्या चल रहा है। हमने दिमागी सुध बुध खो चुकी बुजुर्ग से बात भी कि जिसने बताया कि उसने अपने बेटे को जंजीर से बांधा था। लेकिन वो चाहती है कि बेटा ठीक हो जाए।

सरबजीत के परिवार की हालत ठीक नही हैं मकान भी खण्डर हो चुका है। घर में दाखिल होने पर ऐसा लगता है मानो सालों से कोई इनकी सुध लेने न आया हो। एक कमरे में यह पूरा परिवार न जाने कैसे जिंदगी बिता रहा था। इसी कमरे में सरबजीत को जंजीर डाली गई थी और वो वहीं मल मूत्र कर रहा था जिसे शायद कभी साफ नहीं किया गया था। कमरे में खड़ा होना भी मुश्किल था। लेकिन मेरा आशियाना संस्था ने इंसानियत की मिसाल देते हुए युवक की जंजीर को तोड़ उसे नरक से आजाद किया और सरबजीत को सालों बाद नहला उसे बाहर की दुनिया दिखाई। फिलहाल मेरा आशियाना की टीम सरबजीत को रेस्क्यू कर साथ ले गई है और वायदा किया कि जल्द सरबजीत को स्वस्थ कर घर भेजेगी।

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