डोडा में शहीद जवान मोहित चौहान पंचतत्व में हुए विलीन, ज़ार- ज़ार रोया समूचा गांव
झज्जर जिले के गांव गिजाड़ोद निवासी शहीद मोहित चौहान का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरा गांव गम और गर्व से भर उठा। शहीद की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा
झज्जर: जम्मू कश्मीर के डोडा में शहीद हुए झज्जर के जवान मोहित चौहान पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। सैन्य सम्मान के साथ पैतृक गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया। मोहित चौहान के भाई जितेंद्र ने नाम आंखों से शहीद मोहित चौहान के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी।
झज्जर जिले के गांव गिजाड़ोद निवासी शहीद मोहित चौहान का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरा गांव गम और गर्व से भर उठा। शहीद की अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। कई किलोमीटर लंबी शव यात्रा के दौरान “भारत माता की जय” और “शहीद मोहित चौहान अमर रहें” के नारों से आसमान गूंज उठा। इस दौरान सेना के जवानों, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी रहेगी।
शहीद के पिता, चाचा और दोस्तों ने मोहित की शहादत पर पूरे देश को गर्व होने की बात कही। पिता ने बताया कि मोहित बेहद ऊर्जावान और जिम्मेदार था, परिवार के हर सदस्य का ख्याल रखता था। उन्होंने बताया कि वे गांव में खेतीबाड़ी के साथ-साथ कपड़ों की सिलाई का काम कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
मोहित के एक करीबी दोस्त, जो 72 आर्म्ड फोर्स में उनके साथ ही ड्यूटी करता था, ने बताया कि उसने मोहित से छुट्टी पर घर चलने को कहा था, लेकिन मोहित ने कुछ दिन बाद छुट्टी लेकर आने की बात कही थी।
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव एवं हरियाणा के पूर्व कृषि मंत्री भी गिजाड़ोद गांव पहुंचे और शहीद मोहित चौहान को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शहीद की कुर्बानी पर पूरे देश को गर्व है और केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार व सेना पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में हुए हादसे में सेना की एक गाड़ी करीब 400 फीट गहरी खाई में गिर गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 10 जवान शहीद हो गए, जबकि 11 जवानों को एयरलिफ्ट कर इलाज के लिए भेजा गया। शहीद मोहित चौहान की सेना में भर्ती करीब 5 साल पहले हुई थी। उनकी नवंबर 2024 में शादी हुई थी। बताया गया कि नवंबर 2025 में शादी की सालगिरह पर वे 10-15 दिन की छुट्टी लेकर घर आए थे। मोहित का एक भाई है, जो गाड़ी चलाकर परिवार का गुजर-बसर करता है।
गांव गिजाड़ोद ही नहीं, बल्कि पूरा जिला और प्रदेश आज अपने इस वीर सपूत को नमन कर रहा है।