रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम बरी, पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
ब्यूरो: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने राम रहीम को बड़ी राहत दी है। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में हाई कोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया है। बाकी तीन की सजा बरकरार रखी है। आपको बता दें कि डेरा प्रमुख राम रहीम को पत्रकार छत्रपति की हत्या के मामले में निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन गुरमीत सिंह ने दोष सिद्धि और सजा को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी, जिस पर पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने आज फैसला सुनाया है।
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम ने दायर अपील में उसी बैलिस्टिक साक्ष्य को कटघरे में खड़ा किया। जिसके आधार पर इस मामले में उनकी सजा पर फैसला सुनाया गया था. इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले से संबंधित गोलियों की (वारदात के वक्त बरामद की गई) अदालत में भौतिक रूप से जांच की। लगभग सात वर्ष पहले इस मामले में डेरा प्रमुख को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसके खिलाफ अपील पर आज फैसला आया है।
गौरतलब है कि इससे पहले चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ द्वारा सुनवाई के शुरुआती चरण में केस प्रॉपर्टी के रूप में पेश की गई ‘लापुआ’ साफ्ट-लीड गोली का निरीक्षण किया गया था। कोर्ट ने ये देखने का प्रयास किया था कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ के कथित हस्ताक्षर या निशान गोली पर मौजूद हो सकते थे या नहीं। हालांकि, जिस प्लास्टिक कंटेनर में गोली रखी गई थी, उस पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की सील सुरक्षित और अक्षुण्ण बताई जा रही थी।
बता दें कि मामले में दायर अपील की सुनवाई पर बचाव पक्ष का मुख्य तर्क ये रहा कि पोस्टमार्टम के दौरान मृतक के शरीर से निकाली गई गोली को बरामदगी के समय से लेकर ट्रायल कोर्ट में खोले जाने तक सीलबंद रखा गया था। यदि दोनों सील सुरक्षित थी, तो फॉरेंसिक प्रयोगशाला के विशेषज्ञ द्वारा गोली की जांच और उस पर हस्ताक्षर करने का दावा संभव कैसे हुआ? बचाव पक्ष ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि कंटेनर पर एम्स की दोनों सील सही अवस्था में थी, नतीजतन कंटेनर खोले बिना अंदर रखी वस्तु तक किसी की पहुंच संभव नहीं थी।
मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा फॉरेंसिक विशेषज्ञ की गवाही ट्रायल कोर्ट में स्पष्ट होने और विशेषज्ञ द्वारा स्वयं कंटेनर खोलकर जांच करने व आवश्यक हस्ताक्षर होने की बात कही गई थी। ये तर्क भी दिया गया था कि ट्रायल के दौरान कंटेनर तक कथित पहुंच या पूर्व जांच संबंधी कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई थी। मामले में सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता द्वारा बताया गया था कि ये गोली आयातित ‘लापुआ’ श्रेणी की साफ्ट-लीड गोली है, जिस पर समय के साथ स्पष्ट निशान टिके रहना आवश्यक नहीं होता। ऐसे में खंडपीठ ने अवलोकन किया कि प्रस्तुत गोलियों पर कोई स्पष्ट निशान दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे में ये स्पष्ट किया जाए कि हस्ताक्षर गोली पर हैं या कंटेनर पर।
हालांकि मामले में कोर्ट को बताया गया था कि कंटेनर पर हस्ताक्षर मौजूद हैं, जबकि गोली पर हस्ताक्षर की स्थिति बारे केवल फॉरेंसिक विशेषज्ञ द्वारा ही निश्चित रूप से बता सकने की बात कही गई थी।


ऐसे में कोर्ट ने मामले में सभी पक्षों को सुना और सभी फॉरेंसिक तथ्यों की भौतिक जांच व अवलोकन के बाद मामले में आज डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम को बरी कर दिया गया है।
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