हरियाणा में सड़क दुर्घटना पीड़ितों को बड़ी राहत, कैशलैस निःशुल्क उपचार योजना से वर्ष 2025 में 4179 घायलों को मिला इलाज
योजना के तहत दुर्घटना की तिथि से अधिकतम सात दिनों की अवधि के लिए प्रत्येक घायल व्यक्ति को प्रति दुर्घटना 1.5 लाख रुपये तक का कैशलैस निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है
चंडीगढ़: सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को त्वरित और प्रभावी उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा संचालित कैशलैस निःशुल्क उपचार योजना के अंतर्गत वर्ष 2025 के दौरान हरियाणा प्रदेश में कुल 4179 सड़क दुर्घटना पीड़ितों को निःशुल्क इलाज की सुविधा प्रदान की गई। इस योजना के तहत दुर्घटना की तिथि से अधिकतम सात दिनों की अवधि के लिए प्रत्येक घायल व्यक्ति को प्रति दुर्घटना 1.5 लाख रुपये तक का कैशलैस निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रदेश के 1228 अस्पतालों को इस व्यवस्था के तहत अनुबंधित किया गया है, जिससे पीड़ितों को समय रहते चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो सके।
सड़क सुरक्षा हरियाणा पुलिस की प्राथमिकता : डीजीपी
इस संबंध में जानकारी देते हुए अजय सिंघल, पुलिस महानिदेशक, हरियाणा ने कहा कि प्रदेश की सड़कों को आमजन के लिए सुरक्षित बनाना हरियाणा पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने हेतु सुनियोजित एवं प्रभावी कार्यनीतियों पर निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने की यह योजना अक्टूबर 2024 में प्रारंभ की गई थी, जिसे नेशनल हेल्थ अथॉरिटी, स्थानीय पुलिस तथा राज्य स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनुबंधित अस्पतालों के आपसी समन्वय से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 के तहत इस योजना में दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को अधिकतम सात दिनों तक 1.5 लाख रुपये की सीमा में कैशलैस निःशुल्क इलाज की सुविधा दी जाती है।
कैशलैस निःशुल्क इलाज की प्रक्रिया
कैशलैस उपचार की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल ले जाया जाता है, जहां अस्पताल प्रबंधन द्वारा संबंधित सॉफ्टवेयर में घायल का विवरण अपलोड कर उसे संबंधित पुलिस थाने को भेजा जाता है।
ब्लैक स्पॉट सुधार से दुर्घटनाओं में कमी
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए किए गए प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, ट्रैफिक एवं हाईवे हरदीप दून ने बताया कि हरियाणा पुलिस द्वारा सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 से 2024 के दौरान प्रदेश में कुल 339 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए, जिनमें से 109 ब्लैक स्पॉट पर संबंधित विभागों द्वारा सुधार कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि शेष ब्लैक स्पॉट पर सुधार कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त आधुनिक eDAR/iRAD प्रणाली की सहायता से भी ब्लैक स्पॉट की पहचान की जा रही है और इस प्रणाली के माध्यम से चिन्हित 183 ब्लैक स्पॉट की सूची अगस्त 2025 में लोक निर्माण विभाग (बीएंडआर) को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी जा चुकी है।
स्कूल बसों की सख्त जांच और ट्रैफिक कैल्मिंग उपाय
उन्होंने आगे बताया कि सुरक्षित स्कूल वाहन नीति के तहत वर्ष 2025 के दौरान प्रदेश में 26,931 स्कूल बसों की जांच की गई, जिनमें नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 5,909 चालान जारी किए गए तथा चार बसों को जब्त किया गया। ट्रैफिक कैल्मिंग उपायों के अंतर्गत हरियाणा पुलिस द्वारा 2,378 स्थानों की पहचान कर उन्हें सुधार के लिए परिवहन विभाग को भेजा गया, जिनमें से दिसंबर 2025 तक 1,228 स्थानों को दुरुस्त किया जा चुका है। वहीं वर्ष 2024 में चिन्हित 600 अवैध कटों में से 411 को बंद कर दिया गया है, जबकि शेष पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर त्वरित सहायता की व्यवस्था
दुर्घटनाओं में त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 44 और 48 पर 45 पुलिस सहायता बूथ स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से अब तक 2,112 सड़क दुर्घटनाओं में सहायता प्रदान करते हुए 1,281 घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाया गया। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति की मासिक बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जा रही हैं। वर्ष 2024 में 141 तथा वर्ष 2025 में दिसंबर तक 228 ऐसी बैठकें आयोजित की गईं।
जन-जागरूकता अभियानों से बढ़ी सहभागिता
जन-जागरूकता की दिशा में हरियाणा पुलिस द्वारा 3,334 जागरूकता अभियानों का आयोजन किया गया, जिनमें 4,38,286 छात्र एवं आम नागरिकों ने भाग लिया। इसके अलावा हरियाणा राज्य ट्रैफिक क्विज प्रतियोगिता 2025-26 के अंतर्गत आयोजित चरणबद्ध प्रतियोगिताओं में लाखों विद्यार्थियों की सहभागिता रही है।
डीजीपी की आमजन से अपील
अंत में डीजीपी अजय सिंघल ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा एक अत्यंत गंभीर विषय है और सड़कों को सुरक्षित बनाने में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे वाहन निर्धारित गति सीमा में चलाएं, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग न करें तथा यातायात नियमों का पूर्ण रूप से पालन करें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही न केवल स्वयं के लिए बल्कि दूसरों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है।