सरकारी आवासों पर अवैध कब्जा जमाए लोगों पर अब कसेगा शिकंजा
कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री[/caption]
नया विधेयक ‘सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत लोगों की बेदखली) संशोधन विधेयक, 2017’ के स्थान पर लाया गया है। इस नए विधेयक को संसद के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा।
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नए विधेयक में ‘सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत लोगों की बेदखली) अधिनियम, 1971’ की धारा 2, धारा 3 और धारा 7 में संशोधन करने की बात कही गई है। इसके लिए धारा 2 में अनुच्छेद (एफबी) से पहले अनुच्छेद (एफए), धारा 3 की धारा 3ए के नीचे एक नई धारा 3बी और ‘सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत लोगों की बेदखली) अधिनियम, 1971’ की धारा 7 के तहत उप-धारा (3) के नीचे एक नई उप-धारा 3ए जोड़ने की बात कही गई है।
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सरकारी आवासों पर अवैध कब्जा जमाए लोगों पर अब कसेगा शिकंजा[/caption]
प्रस्तावित संशोधनों से संपदा अधिकारी सरकारी आवासों पर अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठे लोगों की बेदखली के लिए बिना विलंब के कार्रवाई करने और मुकदमेबाजी की अवधि के दौरान सरकारी आवास पर कब्जा बनाए रखने के एवज में क्षति प्रभार लगाने में समर्थ हो जाएंगे।
वर्तमान पीपीई अधिनियम, 1971, जिसमें पीपीई अधिनियम विधेयक, 2015 के जरिए संशोधन किया गया है, के तहत बेदखली की प्रक्रिया में लगभग 5 से 7 हफ्तों का समय लग जाता है। हालांकि, अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठे लोगों को बेदखल करने में बेहद लंबा समय, यहां तक कि कई वर्ष भी लग जाते हैं। प्रस्तावित विधेयक के तहत संपदा अधिकारी को नोटिस भेजने, कारण बताओ नोटिस भेजने और जांच करने जैसी लंबी-चौड़ी प्रक्रियाओं का पालन नहीं करना होगा, बल्कि वे तत्काल बिना किसी विलंब के बेदखली प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
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