मुख्यमंत्री ना असेंबली में सुरक्षित और न ही जनता में: हुड्डा

Bhupinder Hooda on Manohar Lal
मुख्यमंत्री ना असेंबली में सुरक्षित और न ही जनता में: हुड्डा
  • कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बयान
  • कांग्रेस किसान आंदोलन का कर रही समर्थन
  • मनोहर सरकार बन चुकी घोटालों की सरकार
  • जनता और विधायकों का विश्वास खो चुकी है सरकार

गुरुग्राम। (नीरज वशिष्ठ) मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ना तो जनता के बीच सुरक्षित हैं और ना ही विधानसभा में, यह कहना है पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का। भूपेंद्र सिंह हुड्डा की माने तो काफी बार कांग्रेस ने विधानसभा का आपातकाल सेशन बुलाने की मांग की है लेकिन हर बार इसे टाल दिया गया। यह दर्शाता है कि मनोहर सरकार जहां जनता के बीच में अपना विश्वास खो चुकी है तो वहीं विधानसभा में विधायकों के बीच में भी अपना विश्वास खोती जा रही है। उन्होंने कहा कि आप देखिएगा कि इस बार के विधानसभा सत्र के दौरान भाजपा और जेजेपी के विधायकों का चेहरा देखने लायक होगा।
यह भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, कृषि कानूनों के लागू होने पर लगाई रोक

Bhupinder Hooda on Manohar Lal
मुख्यमंत्री ना असेंबली में सुरक्षित और न ही जनता में: हुड्डा

वहीं किसानों के समर्थन पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस किसानों के आंदोलन का नेतृत्व नहीं बल्कि समर्थन करने में लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री की माने तो मौजूदा मनोहर सरकार घोटालों की सरकार में तब्दील होती जा रही है। चाहे शराब घोटाले की बात हो, रजिस्ट्री घोटाले की बात हो या फिर अन्य घोटालों की बात, बीते 6 साल में मनोहर सरकार में घोटालों की जैसे झड़ी सी लगी है।

Bhupinder Hooda on Manohar Lal
मुख्यमंत्री ना असेंबली में सुरक्षित और न ही जनता में: हुड्डा

वहीं मानेसर लैंड डील मामले में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है और मनोहर सरकार ने इस पूरे मामले पर राजनीति करते हुए कार्रवाई की है। जल्द ही इस पूरे मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

यह भी पढ़ें- नई प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर Whatsapp की सफाई, कही ये बात

Bhupinder Hooda on Manohar Lal
मुख्यमंत्री ना असेंबली में सुरक्षित और न ही जनता में: हुड्डा

आईएनएलडी के एकमात्र विधायक और दिग्गज नेता अभय सिंह चौटाला के इस्तीफे पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अभय चौटाला को अविश्वास पत्र का समर्थन करने की बात कही है। यानी किसान आंदोलन पर आने वाले दिनों में सियासत और गरमाने के आसार जरूर नजर आने लगे हैं।