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दिवाली से पहले ही हरियाणा का बिगड़ा वायु प्रदूषण का स्तर !

हरियाणा में दिवाली से पहले ही वायु प्रदूषण का स्तर काफी बिगड़ गया है...अगर अलग अलग ज़िलों की बात करें तो गुरुग्राम में वायु की गुणवत्ता यानी AQI स्तर 500 तक पहुंच गया है

Reported by:  PTC News Desk  Edited by:  Baishali -- October 28th 2024 01:56 PM
दिवाली से पहले ही हरियाणा का बिगड़ा वायु प्रदूषण का स्तर !

दिवाली से पहले ही हरियाणा का बिगड़ा वायु प्रदूषण का स्तर !

हरियाणा में दिवाली से पहले ही वायु प्रदूषण का स्तर काफी बिगड़ गया है...अगर अलग अलग ज़िलों की बात करें तो गुरुग्राम में वायु की गुणवत्ता यानी AQI स्तर 500 तक पहुंच गया है...ये वो स्तर है जिसमें सामान्य इंसान भी बीमार हो सकता है. वहीं फतेहाबाद में भी AQI 416 हो चुका है यानी यहां भी हालत खराब है. 


इतना वायु प्रदूषण होने के बावजूद पराली जलाने के केसों में कमी नहीं नज़र आ रही है.. प्रदेश में रविवार को पराली जलाने के कुल 13 नए केस सामने आए हैं. कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर ज़िलों की अगर बात करें तो यहां सबसे ज्यादा .यानी दो से तीन पराली जलाने के केस सामने आए हैं...

हरियाणा में दिवाली से पहले ही वायु प्रदूषण का स्तर काफी बिगड़ गया है...अगर अलग अलग ज़िलों की बात करें तो गुरुग्राम में वायु की गुणवत्ता यानी AQI स्तर 500 तक पहुंच गया है...ये वो स्तर है जिसमें सामान्य इंसान भी बीमार हो सकता है. वहीं फतेहाबाद में भी AQI 416 हो चुका है यानी यहां भी हालत खराब है. 

इतना वायु प्रदूषण होने के बावजूद पराली जलाने के केसों में कमी नहीं नज़र आ रही है.. प्रदेश में रविवार को पराली जलाने के कुल 13 नए केस सामने आए हैं. कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर ज़िलों की अगर बात करें तो यहां सबसे ज्यादा .यानी दो से तीन पराली जलाने के केस सामने आए हैं...हिसार ज़िले की बात करें तो पिछले कुछ दिनों से राहत तो है लेकिन  ये सिर्फ हिसार की बात नहीं है पूरे प्रदेश की बात है. हालांकि हिसार में पराली जलाने पर 11 चालान भी दर्ज किए जा चुके हैं, केस भी 11 दर्ज हो चुके हैं, यहां तक कि 8 किसानों की मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री भी दर्ज की चुकी है. ऐसे में वो किसान MSP पर फसल खरीद नहीं करवा पाएंगे. 

PM 10 क्या है और क्यों है खतरनाक !

आपको बता दें कि PM10 की अवस्था में निर्माण स्थलों, लैंडफिल और कृषि, जंगल की आग और कचरा जलाने, खुली ज़मीन में हवा में उड़ने वाली धूल, बैक्टीरिया के टुकड़े भी शामिल हो जाते हैं. ये कण इतने छोटे होते हैं कि वे आपके गले और फेफड़ों के अंदर पहुंच सकते हैं और आपके शरीर को भयंकर नुकसान पहुंचा सकते हैं. यहां तक कि PM10 हाई लेवल खांसी, नाक बहने, आंखों में जलन जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकता है. अगर यही हालात लगातार बने रहे तो ऐसी हालत में GRAP-4 लागू होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता. यानी हवा के प्रदूषण के भयावह सत्र से इमरजेंसी के हालात बन सकते हैं. 



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