जाली दस्तावेजों पर जारी किए गए 392 मोबाइल सिम कार्ड पुलिस ने करवाए बंद
उन्होंने कहा कि इंटरनेट के दौर में ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं और भोले-भाले लोगों को ऑनलाईन ठगी कर साइबर जालसाजों द्वारा धोखा दिया जा रहा है। ऐसे सभी धोखेबाज अक्सर गिरफ्तारी से बचने के लिए फर्जी आईडी प्रूफ पर सिम कार्ड प्राप्त करके अपनी गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। ऐसे मोबाईल नंबरों को बंद करवाना जरूरी होता है ताकि साइबर अपराधी अन्य लोगों के साथ ठगी न कर सकें।
साइबर ठगी से बचने के कुछ एहतियाती उपायों पर प्रकाश डालते हुए विर्क ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार दूसरों से ठगी कर पैसा बनाने के नए तौर-तरीकों की खोज कर रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सलाह दी जाती है कि नागरिक ना तो अपने बैंक खाते, सीवीवी कोड, ओटीपी जैसी किसी भी व्यक्तिगत जानकारी को साझा करें और ना ही व्हाट्सएप या ईमेल पर संदिग्ध लिंक का जवाब दें क्योंकि ऐसा करने से साइबर अपराधी बैंक खातों से धन निकाल सकते हैं।
पुलिस द्वारा समय-समय पर लगातार नागरिकों को फोन कॉल, ईमेल और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त होने वाले अवांछित और काल्पनिक प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह दी जाती है। साथ ही, मोबाइल सेवा प्रदाताओं को सिम कार्ड लेने वालों के दस्तावेजों को ठीक से सत्यापित करने के लिए भी कहा गया है।
नागरिकों को साइबर जालसाज़ों के बहकावे में नहीं आने के लिए सावधान करते हुए विर्क ने कहा कि इस प्रकार की ठगी की शिकायत ई-मेल के माध्यम से cybercrime.gov.in अथवा संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय या पुलिस थाने में दर्ज की जा सकती है। ---PTC NEWS---