जींद उपचुनाव पर मांगे राम गुप्ता और टेकराम कंडेला कैसे डालेंगे प्रभाव ?

Jind By Election
जींद उपचुनाव पर मांगे राम गुप्ता और टेकराम कंडेला कैसे डालेंगे प्रभाव ?

चंडीगढ़। (ब्यूरो इनपुट) जींद में जीत के लिए हर कोई राजनीतिक दल अपने-अपने पैंतरे चल रहा है। मगर जीत किसे मिलेगी यह अभी कहा नहीं जा सकता है। इस चुनाव में एक ओर जहां बीजेपी की साख दांव पर है, वहीं जेजेपी पर अपना खाता खोलने का दबाव है। उधर कांग्रेस भी इस सीट को जीतकर आगामी चुनावों के लिए अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश में है और इनेलो उमेद रेढू के जरिए अपना प्रभुत्व कायम रखना चाहती है। इस सब के बीच जींद की राजनीति किसके इर्दगिर्द घूमती है। इसका भी विश्लेषण कर लेते हैं। करीब-करीब दो लाख मतदाताओं वाले जींद में कांग्रेस ने रणदीप सुरजेवाला, जेजेपी ने दिग्विजय चौटाला और इनेलो ने उमेद सिंह रेढू को मैदान में उतारकर जाट कार्ड खेला है। जाट वोट बैंक के बंटने का असर या लाभ भाजपा के उम्मीदवार कृष्ण मिड्ढा मिलने की उम्मीद है।

वहीं जींद की धुरी रहे मांगे राम गुप्ता और खाप नेता टेकराम कंडेला इस चुनाव में खासा असर डाल सकते हैं। इन दोनों नेताओं का क्षेत्र में अपना वोट बैंक हैं। ऐसे में ये नेता जिस भी दल की तरफ मुड़ जाए तो स्वभाविक सी बात है उस दल का पलड़ा भारी ही होगा।

मांगे राम गुप्ता लंबे समय तक प्रदेश और जींद की राजनीति में महत्पूर्ण कद रखते हैं। मांगेराम गुप्ता चौधरी भजनलाल और भूपेंद्र हुड्डा की सरकार में मंत्री भी रहे हैं। 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मंत्री मांगे राम गुप्ता ने कांग्रेस छोड़कर एचजेसी का दामन थाम लिया था। बाद में वह इनेलो में शामिल हो गए थे। अब इनेलो में भी वह और उनका परिवार ज्यादा सक्रिय नहीं है। मांगे राम गुप्ता को कई राजनीतिक दलों ने चुनाव लड़ने के लिए भी ऑफर दिया था लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। क्षेत्र में प्रभाव होने के चलते हर कोई मांगेराम गुप्ता को अपनी ओर करने में लगा हुआ है। तमाम पार्टियों के बड़े नेता मांगेराम गुप्ता से मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि अभी तक सीधे तौर पर मांगे राम गुप्ता ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि मांगे राम गुप्ता बीजेपी उम्मीदवार को समर्थन दे सकते हैं।

उधर खाप नेता टेकराम कंडेला का भी जींद में काफी दबदबा है। टेकराम कंडेला बीजेपी टिकट के प्रबल दावेदारों में से एक थे। टेकराम कंडेला समाज सेवा और किसानों की आवाज उठाते रहे हैं। टिकट ना मिलने से थोड़े नाराज चल रहे टेकराम कंडेला को अब बीजेपी ने मना लिया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने खुद उनसे मुलाकात की जिसके बाद कंडेला ने भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिड्‌ढा के लिए प्रचार करने का ऐलान किया। हालांकि उनका कहना है कि कंडेला खाप में 28 गांव आते हैं। सभी एकजुट हैं। लेकिन यह फैसला उनका अपना है, खाप का नहीं।

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टेकराम कंडेला जींद जिला की सबसे मजबूत खाप कंडेला से संबंध रखते हैं। कंडेला खाप में कुल 28 गांव आते हैं। टेकराम कंडेला ने पहले 1991 में इनेलो की टिकट पर चुनाव लड़ा था। तब उनको 22 हजार मत मिले थे। इसके बाद उन्होंने 2014 में आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें 11 हजार 200 मत मिले थे। ऐसे में देखा जाए तो टेकराम कंडेला का अपना वोटबैंक करीब 10 हजार से ज्यादा का है और अगर यह वोट बीजेपी उम्मीदवार के पाले में जाते हैं तो संभावित तौर पर बीजेपी उम्मीदवार का पलड़ा भारी नजर आएगा।

बहरहाल जींद विधानसभा सीट पर हो रहा उपचुनाव राज्‍य की राजनीति से जुड़े कई सवालों के जवाब देगा। इस उपचुनाव में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की साख जहां दांव पर लगी है। वहीं चौटाला परिवार की राजनीतिक विरासत को लेकर भी इस चुनाव में फैसला होना है। इसके साथ ही प्रदेश में कांग्रेस की वापसी की आस पर भी इस चुनाव में निर्णय होना है। अब सबकी नजर मतदान वाले दिन पर टिकी है। जब जींद के लोग इन उम्मीदवारों की जीत और हार का फैंसला करेंगे।