श्री अमरनाथ यात्रा के दौरान इन 40 खाने-पीने की चीजों पर लगा बैन, यहां चेक करें लिस्ट
ब्यूरो : अगले महीने से शुरू हो रही श्री अमरनाथ यात्रा के लिए 40 से अधिक खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और तीर्थयात्रियों को रोजाना कम से कम पांच किलोमीटर पैदल चलकर अपने शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करने की सलाह दी गई है। श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड ने गुरुवार को जारी स्वास्थ्य परामर्श में यह जानकारी दी।
प्रतिबंधित वस्तुएं क्या हैं?
प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों में 'कोल्ड ड्रिंक्स' और 'फास्ट फूड' भी शामिल हैं। स्वास्थ्य परामर्श में दक्षिण कश्मीर में हिमालय तीर्थ यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों को अपने शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए रोजाना सुबह और शाम चार से पांच किलोमीटर पैदल चलने को कहा गया है।

कब शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा ?
अमरनाथ यात्रा एक जुलाई से शुरू होगी। इसके लिए दो रूट हैं, जिनमें अनंतनाग जिले में 48 किमी लंबा नुवान-पहलगाम रूट और गांदरबल जिले में 14 किमी लंबा ट्रैक शामिल है। अधिकारियों ने कहा, "अमरनाथ यात्रा शुरू करने से पहले, निषिद्ध खाद्य पदार्थों की सूची और यात्रा के दौरान आप जो खाद्य पदार्थ ले जा सकते हैं, उनकी जांच करें।"
श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की सलाह के अनुसार जिन खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें पुलाव, फ्राइड राइस, पूरी, पिज्जा, बर्गर, भरवां परांठा, डोसा, माखन रोटी, अचार, चटनी, तले हुए पापड़, चाउमीन और अन्य शामिल हैं। इसके अलावा तली हुई चीजें भी इसमें शामिल हैं।

बोर्ड ने तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्वस्थ खाद्य पदार्थों जैसे अनाज, दालें, हरी सब्जियां और सलाद के साथ चावल के कुछ व्यंजनों की सिफारिश की है। बोर्ड के अनुसार, गांदरबल और अनंतनाग जिलों के जिला मजिस्ट्रेट रणबीर दंड संहिता के तहत उचित आदेश जारी करेंगे, जिसमें प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों के उल्लंघन के लिए लगाए जाने वाले जुर्माने का प्रावधान होगा।
अमरनाथ शिवलिंग की कथा
शिवलिंग की कथा भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी हुई है। खास बात यह है कि यह शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बर्फ से बना है। कहा जाता है कि इस गुफा में जगह-जगह से पानी की बूंदें टपकती रहती हैं, जिससे स्वाभाविक रूप से शिवलिंग का निर्माण होता है। यहां हर साल प्राकृतिक बर्फ से करीब 10 फीट ऊंचा शिवलिंग बनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग का आकार चंद्रमा के आकार के घटने-बढ़ने के साथ-साथ घटता-बढ़ता रहता है। हैरानी की बात यह है कि यहां बना शिवलिंग प्राकृतिक बर्फ से बना है, जबकि गुफा के अंदर की बर्फ कच्ची है जो छूने पर पिघल जाती है। अष्ट पूर्णिमा से लेकर रक्षाबंधन तक लाखों श्रद्धालु यहां शिवलिंग के दर्शन के लिए आते हैं।
- PTC NEWS