कोरोना संक्रमण के अचानक बढ़े मामलों पर हुड्डा ने जताई चिंता

By Arvind Kumar - May 04, 2020 5:05 pm

चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कोरोना संक्रमण के मामलों में अचानक आए उछाल पर गहरी चिंता जताई और किसान द्वारा धान न उगाने के सरकारी आदेश पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि हरियाणा में कोरोना संक्रमण अब तक कंट्रोल में नज़र आ रहा था। लेकिन, रविवार को एक ही दिन में 50 से ज़्यादा केस सामने आना सामान्य नहीं कहा जा सकता है। सरकार को विस्तृत जानकारी जुटानी चाहिए कि अचानक एक ही दिन में इतने ज्यादा मामले कैसे बढ़े, आख़िर कहां चूक हुई है। कोरोना के ख़तरे को देखते हुए मुख्यमंत्री को ताज़ा हालात की समीक्षा करने के बाद ही ढील देने बारे फ़ैसला लेना चाहिए। लॉकडाउन में ढील को लेकर ख़ुद प्रदेश के गृह और स्वास्थ्य मंत्री डरे हुए हैं। हुड्डा ने कहा कि मुख्यमंत्री को गृह मंत्री व स्वास्थ्य मंत्री की चिंताओं और जमीनी परिस्थितियों पर गौर करना चाहिए।

हुड्डा ने कहा कि देश में फिलहाल कोरोना का ख़तरा न ख़त्म हुआ है और न ही कम हुआ है। इसलिए सरकार को ज़्यादा से ज़्यादा टेस्टिंग और जागरुकता फैलाने पर ज़ोर देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि टेस्टिंग के साथ सरकार सुनिश्चित करे कि हर स्वास्थ्य कर्मी और कोरोना योद्धा के पास बचाव सामग्री, PPE किट आदि मौजूद हो। क्योंकि, कुछ ज़िलों में कोरोना पॉजिटिव केसों में स्वास्थ्य कर्मी भी हैं, जो संक्रमित जगहों पर काम करने की वजह से बीमार हुए हैं। हुड्डा ने आम जनता से भी पहले से ज्यादा एहतियात बरतने तथा सोशल डिस्टेंसिंग के साथ सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की।

नेता प्रतिपक्ष ने किसानों के मुद्दे पर भी सरकार का ध्यान खींचा। सरकार ने हाल में करनाल, कैथल, जींद, कुरुक्षेत्र, अम्बाला, यमुनानगर और सोनीपत में पंचायती जमीन को पट्टे पर लेने वाले किसानों के लिए जो आदेश जारी किया है, उस पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा इसकी सीधी मार गरीब और छोटे किसान पर पड़ेगी। क्योंकि पंचायती जमीन अक्सर छोटी जोत वाला गरीब, लघु एवं सीमान्त किसान ही लीज पर लेता है। बुआई से ऐन पहले किसान को धान बोने से रोकना कतई गलत है। हुड्डा ने कहा कि सरकार को अगर गिरते भूजल स्तर की चिंता है तो उसे कांग्रेस सरकार के वक्त शुरू की गई दादूपूर नलवी नहर परियोजना को बंद नहीं करना चाहिए। इस कठिन दौर में भूजल स्तर की चिंता के नाम पर किसान को चोट सही नहीं है। किसानों को धान के विकल्पों पर विचार करने के लिए समय देना चाहिए। जिन वैकल्पिक फसलों मक्का, दलहन, तिलहन और मूंग की सरकार बात कर रही है, उनके बारे में किसानों को पूरी जानकारी, संसाधन, प्रोत्साहन और मार्किट मुहैया करवानी चाहिए। तभी किसान दूसरी फसलों को उगाने के लिए तैयार हो पाएगा।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रदेश का किसान पहले ही बेमौसमी बारिश और कोरोना की मार झेल रहा है। उसे न मुआवजा मिल पाया है और न ही अपनी फसल की सही कीमत। ऊपर से अगर सरकार उसे धान उगाने से भी रोकेगी तो हजारों किसानों और उनके परिवारों के सामने दो जून की रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। सरकार को महामारी के कठिन समय में ऐसे फ़ैसलों से परहेज करना चाहिए। उसे सारा ध्यान मंडियों में फसल लेकर पहुंच रहे किसानों की तरफ देना चाहिए। क्योंकि विपक्ष के बार-बार गुहार लगाने के बावजूद मंडियों से अनाज का उठान नहीं हो पा रहा है। प्रदेशभर से रोज़ लाखों मीट्रिक टन अनाज के भीगने की ख़बरें आ रही हैं। ख़रीद शुरू होने के इतने दिन बाद भी सरकार आवक के हिसाब से न उठान करवा पा रही है और न ही अनाज को सुरक्षित रखने के लिए तिरपाल आदि का बंदोबस्त कर पा रही है। फसल ख़रीद के बाद किसानों और आढ़तियों को भुगतान करने की प्रक्रिया भी सुस्त है। सरकार का दावा था कि फसल बेचने के बाद 72 घंटे में किसान की पेमेंट हो जाएगी, लेकिन करीब दो हफ्ते बाद भी ज़्यादातर किसानों की पेमेंट नहीं हुई है।

---PTC NEWS---

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