सरकार की रिपोर्ट में खुलासा, आंदोलन में शामिल होने वाले किसानों के गांवों में ज्यादा फैला कोरोना

By Arvind Kumar - May 24, 2021 8:05 pm

चंडीगढ़। हरियाणा में लॉक डाउन लगाने के बाद कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी से कमी आई है। इस दौरान एक्टिव मरीजों की संख्या जहां कम हुई है। वहीं प्रदेश का रिकवरी रेट भी एक बार फिर बढ़कर 90 फ़ीसदी से ऊपर हो गया है। हालांकि दिल्ली बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन कोरोना के लिए एक खतरे की घंटी है।

चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रिंसिपल मीडिया एडवाइजर विनोद मेहता ने एक आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश के उन गांव में कोरोना संक्रमण और मौतों का आंकड़ा ज्यादा है। जहां से लोग नियमित तौर पर किसान आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि बरोदा हलके के 14 गाँव से 36 परिवार किसान आंदोलन में नियमित तौर पर सक्रिय हैं। इन गांव में कोरोना की पहली लहर में जहां 63 लोगों की मौत हुई थी। वहीं इस साल ये आंकड़ा बढ़कर 183 हो चुका है।

वहीं हरियाणा सरकार ने किसान आंदोलन के चलते हरियाणा में कोरोना संक्रमण की बढ़ोतरी पर एक आंतरिक रिपोर्ट तैयार की है। इसके मुताबिक सिंघु बार्डर पर और टिकरी बॉर्डर पर चल रहे धरने में शामिल होने वाले किसानों के गांवों में कोरोना संक्रमण और मौतें बढ़ी हैं। सोनीपत जिले के 13 गांव से कुंडली बॉर्डर पर किसानों की रही नियमित भागीदारी रही। इन गांवों में पिछले महीने करीब 189 मौतें हुई। वहीं सिसाना बरोदा बुटाना और खान पुर गावं में एक महीने में 86 मौतें हुईं। आधिकारिक तौर पर 189 मौतों में से 22 मौतें कोरोना से हुईं हैं लेकिन मरने वाले कई लोगों में कोरोना के लक्षण थे लेकिन उनकी जांच नहीं हुई। सरकार के मुताबिक ऐसे मरीजों की संख्या 50 फीसदी के आसपास है।

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करनाल जिले के 4 गावं गगसीना जयसिंह पुर गोंदर और उँगद गांवों से काफी संख्या में किसान आंदोलन में शामिल हो रहे थे। यहां एक महीने में 29 मौत हुई। कैथल में 6 गांव से 49 लोगों ने किसान आंदोलन में भाग लिया था। पिछले साल यहां 34 लोगों की मौत हुई थी लेकिन इस साल 1 अप्रैल से 10 मई के बीच 35 लोगों की मौतें हुई जिसमें पांच कोरोना से जान गई।

Yellow fungus cases in UP : Know why it can prove more dangerous than black, white fungusजींद में 13 गांव में पिछले साल इसी अवधि के दौरान 60 लोगों की मौत हुई थी। वहीं इस साल 156 लोग मरे इसमें 24 मौतें कोरोना से हुई। झज्जर के 9 गांवों में पिछले साल 52 लोगों की मौत हुई। वहीं इस अवधि के दौरान इस साल 114 लोगों की मौत हुई जबकि 25 लोग करोना से मरे। भिवानी में 3 गांव में पिछले साल 15 लोगों की मौत हुई थी। वहीं इस साल 23 लोग मरे जिसमें दो मौतें कोरोना से हुई। प्रदेश के अन्य जिलों में भी जिन गांवों से किसान नियमित तौर पर किसान आंदोलन में शामिल हुए वहां कोरोना संक्रमण बढ़ा है।

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