हरियाणा

बंदरों के आतंक से पूरा स्कूल परेशान, पिंजरे में कैद हुआ बचपन

By Vinod Kumar -- May 20, 2022 5:37 pm -- Updated:May 20, 2022 5:37 pm

क्या आपने कोई ऐसा स्कूल देखा है जिसमें बच्चों को पिंजरे नुमा कमरे में कैद होकर पढ़ना पड़ता हो। अगर क्लास रूम से बाहर पानी पीने के लिए जाना हो तो मास्टर जी बड़े-बड़े लाठी-डंडे हाथ में लेकर बच्चों को पानी पिलाने ले जाते हैं। यही नहीं जब स्कूल की छुट्टी होती है तो भी हाथों में लाठी डंडे लेकर बच्चों को स्कूल के बाहर गेट पर छोड़ कर आते हैं।

भिवानी के कोंट गांव के मॉडल संस्कृति प्राथमिक स्कूल में आज बंदरों के आतंक के चलते बच्चे डर के साए में पढ़ने को मजबूर हैं। यही नहीं बंदरों के डर से 29 बच्चों ने स्कूल ही छोड़ दिया है। बंदरो के डर से बच्चे ग्राउंड में खेल भी नहीं सकते न ही सर्दियों में बच्चों को धूप में भी बिठा सकते है। यहां तक कि बच्चे स्कूल में खेल भी नहीं सकते हैं। इस कारण बच्चो का शारीरिक विकास भी नहीं हो पा रहा।

मॉडल संस्कृतिक प्राथमिक विद्यालय के प्राचार्य अजय कुमार ने बताया कि बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ बंदरों से बचाना बड़ी चुनौती है अगर किसी बच्चे को बाथरूम जाना हो तो एक शिक्षक को डंडा लेकर गार्ड के रूप में साथ जाना पड़ता है। कमरों के बाहर बने बरामदे को लोहे की जाली से कवर किया गया है, ताकि कक्षा में बंदर ना आ सके। पहले बंदर बच्चों की कॉपियां, बैग तक उठा ले जाते थे। शिक्षा विभाग व प्रशासन को कई बार लिखित में शिकायत दे चुके हैं।

साल 2019 बंदरों को पकड़ा भी गया, लेकिन अब बहुत ज्यादा बंदरों की संख्या हो चुकी है। जोकि 30-40 के झुंड में आकर बच्चों, महिला शिक्षक व अन्य स्टाफ को अपना निशाना बना लेते हैं। मंगलवार को लोग आस्था के कारण केले चूरमा डाल जाते हैं। इस वजह से इनकी संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

स्कूल प्राचार्य ने बताया कि इस स्कूल में लगभग 227 बच्चों के साथ 24 लोगों का स्टाफ है। इसी स्कूल परिसर में आंगनवाड़ी केंद्र भी बना हुआ है जिसमें गर्भवती महिलाएं भी आती हैं जो बंदरों के आतंक से परेशान हैं।

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