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budget 2022-23: बजट से करदाताओं का हाथ लगी मायूसी... न स्लैब्स बदली न छूट बढ़ी

Reported by:  PTC News Desk  Edited by:  Vinod Kumar -- February 01st 2022 01:38 PM -- Updated: February 01st 2022 02:26 PM
budget 2022-23: बजट से करदाताओं का हाथ लगी मायूसी... न स्लैब्स बदली न छूट बढ़ी

budget 2022-23: बजट से करदाताओं का हाथ लगी मायूसी... न स्लैब्स बदली न छूट बढ़ी

budget 2022-23: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2022-23 के लिए आम बजट पेश किया। न तो आयकर स्लैब्स बदली गई है और न ही कोई बड़ी छूट दी गई है। आम लोगों को उम्मीद थी कि कोरोना महामारी और महंगाई के बीच कम से कम उन्हें टैक्स में कोई छूट जरूर मिलेगी, लेकिन इस बार वित्त मंत्री ने कोई छूट नहीं दी है। टैक्स स्लैब में जिस दर से पहले टैक्स लगता था, उसी तरह लगेगा। बजट में टैक्स स्लैब्स में कोई बदलाव नहीं हुआ है। व्यक्तिगत करदाताओं के लिए बुनियादी छूट की सीमा में आखिरी बार बदलाव 2014 में हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का पहला बजट पेश करते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने करमुक्त आय की सीमा को 2 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये किया था। वरिष्ठ नागरिकों के लिए करमुक्त आय की सीमा को बढ़ाकर 2.5 लाख से 3 लाख रुपये किया गया था। तब से करमुक्त आय की सीमा नहीं बढ़ी है। हालांकि, करदाताओं को बड़ी राहत के तौर पर दो साल में अपने रिटर्न को अपडेट करने की अनुमति दी है। व‍ित्‍त मंत्री की तरफ से की गई घोषणा के बाद अब जुर्माना भरकर 2 साल पिछला आईटी रिटर्न्स अपडेट कर सकेंगे। कई बार टैक्सपेयर से गलती हो जाती है, अब सरकार की तरफ से इसे अपडेट करने का मौका म‍िलेगा। यह टैक्सपेयर्स के ल‍िए अच्‍छी शुरुआत मानी जा रही है। इसके अलावा व‍ित्‍त मंत्री ने दिव्यांगों के लिए टैक्स में राहत का भी प्रस्ताव पेश किया। स्टैंडर्ड डिडक्शन में आखिरी बार 2019 में इजाफा किया गया था। लोग इस बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन में इजाफे की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि, सरकार ने इसको लेकर किसी तरह का ऐलान नहीं किया। इससे Salaried Taxpayers को निराशा हाथ लगी। वर्तमान में Salaried Taxpayers को 50 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction Limit) मिलता है। क्या होता है स्टैंडर्ड डिडक्शन? स्टैंडर्ड डिडक्शन आपकी इनकम का वह हिस्सा है जिस पर टैक्स देय नहीं होता है। इससे आपके टैक्स बिल में कमी आ जाती है. यह एक तरह की ऐसी छूट है जिसके लिए खर्च का कोई प्रुफ दिखाने की जरूरत नहीं होती है। इसे आम तौर पर ग्रॉस सैलरी में से घटा दिया जाता है। इस समय सभी सैलरीड टैक्सपेयर्स को 50 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है. ऐसे में अगर आपकी सालाना ग्रॉस सैलरी 6 लाख रुपये है तो स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद यह 5.50 लाख रुपये रह जाएगी।


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