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योजना नहीं छलावा है ‘भावांतर भरपाई’, भावांतर की बजाय एमएसपी तय की जाए: हुड्डा

Reported by:  PTC News Desk  Edited by:  Arvind Kumar -- June 13th 2020 06:19 PM
योजना नहीं छलावा है ‘भावांतर भरपाई’, भावांतर की बजाय एमएसपी तय की जाए: हुड्डा

योजना नहीं छलावा है ‘भावांतर भरपाई’, भावांतर की बजाय एमएसपी तय की जाए: हुड्डा

चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा सब्ज़ी, मक्का और सूरजमुखी उत्पादक किसानों के समर्थन में आगे आए हैं। उनका कहना है कि सब्ज़ी उत्पादक किसानों के लिए ‘भावांतर भरपाई’ कोई योजना नहीं बल्कि एक छलावा है। इससे किसानों को लाभ होने के बजाय उल्टा नुकसान हो रहा है। ख़ुद किसानों का कहना है कि उन्हें इससे रत्तीभर भी फ़ायदा नहीं हुआ। दूसरी तरफ सरकार इस योजना का गुणगान करते नहीं थकती। उसे बताना चाहिए कि अबतक इसके तहत कितने किसानों को कितना रुपया दिया गया है और वो कौन से किसान हैं।

हुड्डा ने कहा कि सरकार भावांतर का झुनझुना बजाना छोड़े और सब्ज़ियों की MSP तय करे। किसानों को बर्बादी से बचाने के लिए ये ज़रूरी है। आज सब्ज़ी उत्पादक किसानों को उनकी फसल का 1 से 2 रुपया किलो का भाव भी नहीं मिल रहा है। जबकि उपभोक्ता को वही सब्ज़ी 20-30 रुपये किलो के रेट पर मिल रही है। यमुनानगर से लेकर दादरी,सोनीपत,पानीपत,करनाल और भिवानी तक के किसान बर्बादी की कगार पर हैं। तोशाम के बाद अब दादरी में किसान भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनका कहना है कि हर एक टमाटर उत्पादक किसान को आज लाखों का घाटा सहना पड़ रहा है। टमाटर उत्पादक किसान अपनी फसल पशुओं के सामने डालने को मजबूर हैं। बावजूद इसके सरकार उनकी हालत पर तरस नहीं खा रही है। किसानों की मांग है कि सरकार उनके नुकसान की स्पेशल गिरदावरी करवाकर फौरन मुआवज़ा दे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सब्ज़ी उत्पादक ही नहीं सूरजमुखी और मक्का के किसान भी सरकारी अनदेखी का खामियाजा भुगत रहे हैं। एक तरफ सरकार ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ योजना का हवाला देकर किसानों को धान की बजाए मक्का उगाने के लिए कह रही है, वहीं दूसरी तरफ किसानों की मक्का ख़रीदने को तैयार नहीं है। आज पीपली, लाडवा, बबैन, कुरुक्षेत्र और इस्माइलाबाद की मंडियां मक्का से अटी पड़ी हैं। किसानों को 1760 रुपए MSP देने की बजाए, महज़ 1200 से 1300 रुपए में मक्का की ख़रीद की जा रही है। किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है।

हुड्डा ने कहा कि सूरजमुखी के किसान भी अपनी फसल बेचने के लिए सरकार का मुंह ताक रहे हैं। लेकिन सरकार की तरफ से मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर रजिस्ट्रेशन बंद किया हुआ है। जो किसान एक ही सीज़न में दो फसलें उगाते हैं, ऐसे ज़्यादातर किसानों की पोर्टल पर एंट्री नहीं हो पाती। मसलन, जो किसान सरसों के बाद सूरजमुखी और आलू के बाद मक्का उगाते हैं उन्हें अक्सर रजिस्ट्रेशन में दिक्कत पेश आती है। रजिस्ट्रेशन ना होने का बहाना बनाकर सरकार उनकी फसल ख़रीदने में आनाकानी कर रही है। यही वजह है कि आज प्रदेश के सब्ज़ी, मक्का और सूरजमुखी उत्पादक किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच चुके हैं। हमारा आग्रह है कि सरकार किसान विरोधी रवैया छोड़कर सभी फसलों को एमएसपी पर जल्दी से जल्दी ख़रीदे। साथ ही किसानों को हुए नुकसान की जल्द भरपाई की जाए। ---PTC NEWS---


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