राजनीति

'ढांचा' गिरते ही कल्याण सिंह ने दे दिया था इस्तीफा, राममंदिर बनने के फैसले पर कही थी ये बात

By Arvind Kumar -- August 22, 2021 10:18 am -- Updated:August 22, 2021 10:18 am

लखनऊ। राम मंदिर आंदोलन और ढांचा विध्वंस के बाद बीजेपी नेता कल्याण सिंह दुनियाभर में छा गए। 6 दिसंबर 1992 को ढांचा गिरते ही कल्याण सिंह ने खुद इस्तीफा लिखकर दे दिया, लेकिन उन्हें जिंदगी में कभी ढांचा गिराए जाने का अफसोस नहीं था।


ढांचा गिराए जाने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने एक किस्सा सुनाया था। कल्याण ने बताया था कि 6 दिसंबर 1992 को केंद्रीय गृहमंत्री ने उन्हें फोन किया। बोले- सूचना है कि कारसेवक गुंबद पर चढ़ गए हैं? मैंने उन्हें जवाब दिया कि मेरे पास तो एक कदम आगे की सूचना है कि उन्होंने गुंबद तोड़ना शुरू कर दिया है।

5 अगस्त 2020 को एक टीवी चैनल को दिए इंटव्यू में उन्होंने बताया था कि ढांचे की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन को चार बटालियन मिल गई थी, लेकिन अयोध्या में वो ढांचे तक नहीं पहुंच पा रही थीं। 3 लाख लोगों की भीड़ ने साकेत महाविद्यालय के पास फोर्स को रोक दिया था। उस दौरान कल्याण सिंह ने लिखित में आदेश दिया कि गोली न चलाई जाए। गोली चलाने के अलावा अन्य उपाय किए जाएं। गोली नहीं चलेगी। देश भर से कारसेवक आए थे। हजारों लोग मारे जाते। मुझे इस बात पर गर्व है कि मैंने एक भी कारसेवक के प्राण नहीं लिए।

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राम मंदिर निर्माण पर 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया तो एक चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि ढांचा ढहाए जाने का मलाल न तो तब था, न अब है। राम मंदिर बनने के फैसले से मैं इतना खुश हूं कि अब मैं चैन से मर पाऊंगा। वहीं कल्याण सिंह ने एक भाषण में कहा था- ‘मैंने अपना जीवन भाजपा के लिए समर्पित किया है। चाहता हूं कि मरूं तो मेरा शव भी भाजपा के झंडे में ही जाए।’

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